अशोकनगर  17 अक्टूबर . जिले में कुपोषण कि स्थिति गंभीर है.  इस बात से जिला प्रसाशन सकते में आ गया और बच्चो कि स्थिति जानी । बच्चे कुपोषित न रहे इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुये सरकार के द्वारा आंगनबाडी केन्द्र एवं अटबाल कल्यान जैसी योजनायें एवं जिला स्तर पर पोषण पुर्नवास केन्द्र संचालित है कई जिलो में समाज सेवी संस्थाओ द्वारा केन्द्रो का संचालन किया जा रहा है अशोकनगर जिले मे स्वास्थ विभाग द्वारा पोषण पुर्नवास केन्द्र का जिम्मा लिया है पर पुर्नवास केन्द्र में  बच्चो के स्वास्थ कि द्रष्टी को ध्यान मे रखते हुऐ केन्द्र में व्यवस्थाओ कि केबल कागजी कार्यवाही मात्र रहती है अभिहाल ही में  कदवाया क्षेत्र से अतिकुपोषित दो बर्षीय बालिका मायावति पुन: जिला अस्पताल में संचालित पोषण पुर्नवास केन्द्र में फिर से भरती की गई।

मायावति सहित कदवाया और समिपस्थ ग्राम राजगढ के दस आदिवासी बच्चे भी कुपोषित हालत में भरती कराये गये। यह सुनिश्चित करने के लिये महिला एवं बाल विकास विभाग के कर्मचारियो कि डयूटी भी पोर्षण पुर्नवास केन्द्र पर लगाई गई है। इनका कहना है कदवाया कि मायावति अतिकुपोषित होने के बाद गंभीर स्थिति में पहुच गई है अव मायावति को बचाने के तमाम प्रयास किये जा रहे है  कुपोषण कि अंतिम स्थिति में पहुची बच्ची को बचाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है.  डां.वीरेन्द्र शर्मा, शिशु एवं वाल रोग्य बिशेषज्ञ।

मैं तीन दिन पहले से लगातार पोषण पुर्नवास केन्द्र पर जाकर व्यवस्थाऐं देख रहा था कलैक्टर महोदय के मार्गदर्शन से पुर्नवास केन्द्र कि व्यवस्थाऐं तुरन्त दुरूस्त हो गई साथ हि विभाग से दो आंगनबाडी कार्यकर्ताओ की सात दिन के लिये पुर्नवास केद्र पर डियूटी लगा दी है हम पुर्नवास केन्द्र पर खुद नजर रखेंगें जिससे बच्चे जल्दी स्वस्थ हो सके।  अखेश जैन,जिला महिला एवं  वाल विकास अधिकारी

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