राजनीतिक गहमा-गहमी के बीच तृणमूल मंत्रियों के इस्तीफे

नई दिल्ली।। तृणमूल कांग्रेस के समर्थन वापसी के बाद मुश्किल में दिख रही यूपीए सरकार को मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी का साथ मिल गया है।  उधर, प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने कहा वे एफडीआई का पक्ष रख देशवासियों को इसके फायदे बताएंगे।

मुलायम ने तमाम अटकलों को खारिज करते हुए शुक्रवार को कहा कि वह सांप्रदायिक ताकतों को सत्ता से दूर रखने के लिए यूपीए सरकार को समर्थन देते रहेंगे। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि मायावती ने भी सरकार को बाहर से समर्थन देते रहने के भारोसा दिलाया है, लेकिन इस बारे में पार्टी ने आधिकारिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है।

मुलायम सिंह यादव ने कहा, हमारा समर्थन स्पष्ट है। हम सांप्रदायिक ताकतों को सत्ता में नहीं आने देंगे। इसीलिए मैं समर्थन कर रहा हूं। मैं यूपीए में नहीं हूं। लेकिन हम समर्थन कर रहे हैं, ताकि सांप्रदायिक शक्तियां आगे नहीं बढ़ सकें। यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी पार्टी यूपीए से समर्थन वापस लेगी, मुलायम ने कहा, हम समर्थन वापस क्यों लेंगे? हमें सांप्रदायिक शक्तियों को सत्ता से दूर रखना है। मुलायम का बयान यूपीए के लिए बड़ी राहत की बात है। लोकसभा में  तृणमूल के समर्थन वापस लेने के बाद यूपीए के सदस्यों की संख्या 273 से घटकर 254 रह गई है। बाहर से समर्थन कर रही समाजवादी पार्टी (22) और बहुजन समाज पार्टी (21) के कारण गठबंधन के पास 545 सदस्यीय लोकसभा में 300 से अधिक सांसदों का समर्थन होगा। सरकार के पास साधारण बहुमत के लिए कम से कम 273 सांसदों का समर्थन होना चाहिए।

सरकार को समर्थन जारी रखने के ऐलान के साथ ही मुलायम ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी यूपीए की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि देश का अगला आम चुनाव थर्ड फ्रंट ही जीतने जा रहा है। बीजेपी और कांग्रेस, दोनों की हार होगी। उन्होंने कहा कि थर्ड फ्रंट की जीत के बाद उसका नेतृत्व कौन करेगा, यह चुनाव के बाद तय किया जाएगा। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए पत्रकारों ने जब मुलायम सिंह से मध्यावधि चुनाव की आशंका पर सवाल किया, तो सीधा सा जवाब मिला कि आखिर मध्यावधि चुनाव है कहां? यह कांग्रेस पर है कि वह सरकार चलाना चाहती है या फिर मध्यावधि चुनाव चाहती है। मुलायम ने कहा कि सरकार के पास बहुमत का आंकड़ा है या नहीं यह सिर्फ संसद में ही तय हो सकता है।

शेरनी की तरह रहूंगी

नई दिल्ली / कोलकाता: यूपीए सरकार में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के सभी छह मंत्रियों ने प्रधानमंत्री को उनके आवास पर जाकर अपने इस्तीफे सौंप दिए। इसके बाद सभी मंत्री राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने गए और उन्हें समर्थन वापसी का पत्र सौंपा, जिसके साथ ही यूपीए सरकार से ममता बनर्जी औपचारिक रूप से अलग हो गईं।

जिस वक्त ममता के मंत्री राष्ट्रपति से मुलाकात कर रहे थे, पश्चिम बंगाल में एक कार्यक्रम में ममता ने कहा कि मैं किसी से डरी नहीं हुई हूं और जब तक जिंदा रहूंगी, शेरनी की तरह रहूंगी। तृणमूल कांग्रेस के सभी छह मंत्री शाम चार बजे प्रधानमंत्री आवास जाकर मनमोहन सिंह को अपने-अपने इस्तीफे सौंप दिए। वहां से वे सत्तारूढ़ गठबंधन से समर्थन वापसी का एक पत्र राष्ट्रपति को सौंपने के लिए राष्ट्रपति भवन रवाना हो गए। तृणमूल कांग्रेस से केंद्रीय मंत्रिपरिषद में छह सदस्य थे। इनमें मुकुल रॉय कैबिनेट मंत्री थे, जबकि सौगत राय, सिसिर अधिकारी, मोहन जटुआ, सुल्तान अहमद और सुदीप बंदोपाध्याय राज्य मंत्री थे। मुकुल रॉय ने कहा कि उनकी पार्टी खुदरा व्यापार के क्षेत्र में एफडीआई के खिलाफ देशव्यापी विरोध शुरू करेगी। उन्होंने कहा, हमारी पार्टी डीजल के दामों में वृद्धि, रियायती सिलेंडरों की संख्या घटाए जाने तथा एफडीआई की अनुमति देने के फैसले के खिलाफ है।

पार्टी ने इसका विरोध करने का फैसला किया है। सरकार का यह फैसला जनविरोधी है और हम इसका समर्थन नहीं कर सकते। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने डीजल के दामों में वृद्धि, रियायती सिलेंडरों की संख्या घटाए जाने तथा खुदरा व्यापार के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति देने के फैसले के मुद्दे पर यूपीए से समर्थन वापस लेने की बुधवार की रात घोषणा की थी।

तृणमूल कांग्रेस द्वारा केंद्र की यूपीए सरकार से समर्थन वापस लिए जाने के बाद कांग्रेस ने कहा है कि वह पश्चिम बंगाल सरकार से अपने मंत्रियों को हटाएगी। पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य ने बताया, तृणमूल कांग्रेस के मंत्रियों द्वारा इस्तीफा (केंद्र से) दिए जाने के बाद हमारी पार्टी से संबंधित मंत्री राज्य की तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार से इस्तीफा देंगे। यह पूछे जाने पर कि कांग्रेस मंत्री किस दिन इस्तीफा देंगे, भट्टाचार्य ने कहा कि वह इस बारे में सही सही नहीं बता सकते कि वे कब इस्तीफा देंगे, क्योंकि उनमें से कुछ फिलहाल बाहर हैं। उन्होंने कहा, हम इस बारे में शाम में  घोषणा करेंगे। राज्य सरकार में कांग्रेस के दो कैबिनेट और चार राज्य मंत्री हैं।

विरोधियों से गुमराह न हों : मनमोहन

नई दिल्ली, 21 सितंबर. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देशवासियों से आर्थिक सुधारों के विरोधियों से गुमराह न होने की अपील करते हुए आज कहा कि कठिन आर्थिक परिस्थितियों के मद्देनजर सरकार को कुछ कठिन फैसले लेने पड़े हैं.

डा. सिंह ने आज रात राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि मुश्किल परिस्थितियों में कई बार राष्ट्र के दूरगामी हित में आसान विकल्पों को छोडऩा पड़ता है. उन्होंने कहा कि 1991 में भी कुछ ताकतों ने इसी तरह गलत सूचनाएं और भय फैलाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की थी लेकिन वे सफल नहीं हो पाये थे और वे इस बार भी अपने मंसूबों में नाकाम होंगे. प्रधानमंत्री ने डीजल की कीमत में वृद्धि, रियायती रसोई गैस सिलेंडरों की आपूर्ति की सीमा बांधने तथा मल्टी ब्रांड खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति देने के फैसलों पर विस्तृत सफाई देते हुए लोगों से सरकार के इन कदमों पर समर्थन की अपील की. उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय आवाम इस कठिन घड़ी में उनके साथ होगा.

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