तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने यूपीए सरकार व संगठन दोनों को छोडऩे का फैसला ले लिया है और साथ ही उसे लागू करने में दो दिन का समय भी किसी समझौते को हो जाने की अपेक्षा में रख लिया. अपेक्षाएं भी वही हैं कि डीजल, रसोई गैस पर बढ़त वापस ली जाए और एफ.डी.आई. पर आगे चर्चा की जाए. शुक्रवार 21 सितम्बर तक कोई फैसला न होने पर उनके मंत्रियों द्वारा मनमोहन सिंह सरकार से  इस्तीफा देने से पार्टी भी बाहर चली जाएगी.

फैसले में यह धमकी भी दी गई है कि तृणमूल कांग्रेस संसद में सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लायेगी. फिलहाल इस धमकी का कोई महत्व नहीं है क्योंकि संसद का अगला सत्र दो महीने बाद होगा. भारतीय जनता पार्टी के श्री लालकृष्ण आडवानी ने इसका फायदा उठाने के लिए फौरन ही यह मांग कर दी है कि संसद सत्र फौरन बुलाया जाए. इस समय भारतीय जनता पार्टी इस बात के लिए बहुत लालायित हैं कि सरकार गिर जाए और लोकसभा चुनाव 2014 के स्थान पर अभी हो जाएं. उसे उम्मीद है कि इसका लाभ उसी को मिलेगा.

अन्य दल समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, द्रमुक, बीजू जनता दल और स्वयं तृणमूल कांग्रेस भी यह जानते हैं कि इस समय चुनाव में उन्हें कोई फायदा नहीं होगा इसलिए ये सरकार नहीं गिरने देंगे. समाजवादी पार्टी ने यह कह भी दिया कि वे तृणमूल कांग्रेस के फैसले से प्रभावित नहीं होंगे. ये पार्टियां जो यूपीए का समर्थन कर रही हैं 20 सितम्बर को भाजपा, वामपंथी दलों के साथ-साथ भारत बंद में तो शामिल हो रही हैं, मूल्यों व एफ.डी.आई. के रोल बैक की मांग भी कर रही हैं. लेकिन यहीं तक सीमित रहेंगी. सरकार को नहीं गिरायेगी.
तृणमूल के लोकसभा में 19 सांसद है. इनके हटने से भी सरकार अल्पमत में नहीं आती है.

इस समय सरकार के समर्थन मेंं 11 पार्टियों के कुल 314 सदस्य है. सरकार को बने रहने के लिये 272 सांसदों को समर्थन हर वक्त बना रहना चाहिए. तृणमूल के 19 सांसदों के हटने से यह संख्या कम होकर भी बहुमत से काफी आगे 295 और 10 पार्टियों की यूपीए सरकार बनी रहेगी. इनके कुल संख्या योग में कांग्रेस के स्वयं के सबसे अधिक 205 सदस्य हैं.
वैसे सभी दल इस समय इस तरह से आश्वस्त होने के बाद भी कि अभी सरकार गिरने व चुनाव लक्षण नहीं है, अपनी अपनी चुनावी तैयारियों में लगे हैं.

इस समय डीजल, एल.पी.जी. के भाव बढ़ाना और एफ.आई.डी. का निर्णय लेना भी मनमोहन सिंह सरकार की जोरदार राजनैतिक चाल व कदम है. भारतीय जनता पार्टी ने कोयला उपखंडों पर प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह का इस्तीफा  मांगने और कोयला उपखंडों का आवंटन रद्द करने पर बहुत ही जोरदार राजनैतिक मुद्दा खड़ा कर लिया था. संसद का पूरा मानसून सत्र भी ठप्प कर दिया. इस टेम्पो को खत्म करने के लिये ही कांग्रेस नेतृत्व ने डीजल, रसोई गैस, व एफ.डी.आई. को मुद्दा उछालकर भारतीय जनता पार्टी का यह मुद्दा ही पीछे ढकेल दिया. अब इस पर वह टेम्पो नहीं रहा  जो भाजपा ने बना दिया था. भारतीय जनता पार्टी इसे अच्छी तरह समझ भी रही है लेकिन वह इस मुद्दे को बरकरार रखने में लिये सफल राजनीति नहीं कर पा रही है. कांग्रेस ने अभी दो दिनों तक ममता को छोड़ा नहीं है, हो सकता है कुछ समझौता हो जाए.

 

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
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