• कांग्रेस का कीमत घटाने से इनकार

नयी दिल्ली, 4 नवंबर, नससे. केंद्र में सत्तारुढ़ यूपीए सरकार में अहम सहयोगी तृणमूल कांग्रेस का पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमत को लेकर सरकार के खिलाफ गुस्सा सातवें आसमान पर आ गया है। उधर कांगे्रस ने कीमत घटाने से इंकार कर दिया है।

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने आज कांग्रेस सरकार पर बरसते हुए कहा कि उनकी पार्टी सिर्फ सरकार में मंत्रालयों के लिए आम आदमी पर बोझ बर्दाश्त नहीं करेगी। ममता ने सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस बहुमत में हैं इसलिए उनकी बात अनसुनी की जाती है। ममता ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी के सांसद केंद्र सरकार से बाहर होने के मत में हैं। ममता  बनर्जी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के देश से बाहर होने के वक्त इस तरह का फैसला लेना बिलकुल गलत है। लेकिन प्रधानमंत्री के लौटते ही हमारी पार्टी उनसे मुलाकात करेगी और अपना विरोध दर्ज कराएगी। ममता ने चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि तृणमूल के बिना केंद्र सरकार नहीं चल पाएगी। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी वापस नहीं ली गई तो वो सरकार का साथ छोड़ देंगे। पेट्रोल मूल्यवृद्धि पर अब केंद्र सरकार अपने ही सहयोगियों से घिरती नजऱ आ रही है।

यूपीए की एक अन्य सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) भी पेट्रोल के दाम बढऩे से नाराज है। पार्टी प्रधानमंत्री के सामने यह मुद्दा उठाएगी। दूसरी तरफ, केंद्र सरकार भी यह मान रही है कि पेट्रोल के दाम में बढ़ोतरी का सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा। केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि तेल का दाम बढऩे से महंगाई के आंकड़े में बढ़ोतरी होगी। लेकिन उन्होंने इस मामले में हाथ खड़े कर दिए। पूरे मामले से पल्ला झाड़ते हुए उन्होंने कहा कि पेट्रोल के दाम अब सरकार के नियंत्रण में नहीं है। उनके मुताबिक इस मामले में सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं है। सरकार के सहयोगियों को तेल के दामों में बढ़ोत्तरी पर अंधेरे में रखने के सवाल पर मुखर्जी ने कहा कि सरकार में भी किसी को तेल के दामों के बढऩे के बारे में जानकारी नहीं थी। प्रणब ने कहा कि तेल के दाम तेल कंपनियां बढ़ा रहीं हैं, सरकार नहीं।

इसलिए सरकार को इस बारे में जानकारी नहीं थी। उधर, कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस की संसदीय दल की बैठक में इस मुद्दे पर पार्टी के सांसदों ने नाराजगी जाहिर की। बैठक के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि पेट्रोल की कीमत बढ़ाने का कदम गरीब और आम आदमी के हित के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सरकार इस तरह की बढ़ोतरी से पहले कैबिनेट को जानकारी दे और उनसे सहमति ले। बंदोपाध्याय ने यह भी कहा कि पिछली बार भी कैबिनेट को भरोसे में लिए बिना ही पेट्रोल के दाम बढ़ा दिए गए थे। उन्होंने कहा कि पार्टी के सांसद अपनी नेता ममता बनर्जी से इस मुद्दे पर मुलाकात करेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे।

पेट्रोल के दाम में ताज़ा बढ़ोतरी तब की गई है जब तेल कंपनियां पिछले कुछ दिनों से प्रति लीटर 25 पैसे का मुनाफा कमा रही हैं। पिछले साल जून में सरकार के नियंत्रण से मुक्त होने के बाद तेल कंपनियां अब तक 43 फीसदी दाम बढ़ा चुकी है। जून में बढ़ोत्तरी से पहले पेट्रोल का भाव 47.93 रुपए प्रति लीटर था। तब से लेकर अब तक पेट्रोल 20.75 रुपए प्रति लीटर महंगा हो चुका  है। 17 महीने में 11 बार पेट्रोल के दाम बढ़ चुके हैं और तो और, सरकार ने यह कहते हुए हाथ खड़े कर दिए हैं कि पेट्रोल की कीमतों पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है। पेट्रोल की कीमतें बढ़ाने के खिलाफ लोगों का भी गुस्सा बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में कीमतें बढ़ाने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों ने अपनी मोटरसाइकिलें कूड़े-कचरे के ढेर पर फेंक दी।
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महंगाई और बढ़ेगी :

वारिष्ठ अर्थशास्त्री प्रो. व्ही.डी. मेहता ने कहा कि पेट्रोल की कीमत बढऩे से यातायात और भाड़ा किराये में वृद्घि होगी जिससे मंहगाई बढेगी और जनता परेशान होगी.
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संसद का शीतकालीन सत्र हंगामेदार रहने के आसार

भाजपा ने संसद के शीतकालीन सत्र गरम रहने का संकेत देते हुए कहा कि जनता को सरकार के खिलाफ विद्रोह करना चाहिये. साथ ही पार्टी ने कहा कि सत्तारुढ़ गठबंधन के सहयोगी दलों को दिखावटी विरोध बंद करना चाहिये. पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि देश की जनता पहले से ही 12.21 फीसदी की मुद्रास्फीति का सामना कर रही है. ऐसे में पेट्रोल के दामों का बढऩा जनता पर दोहरी मार की तरह है. उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि जनता इस भ्रष्ट और असंवेदनशील सरकार को उखाड़ फेंके. डॉ. राम मनोहर लोहिया कहते थे कि जिंदा कौमें पांच साल इंतजार नहीं करती. मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ इस देश की जनता से आह्वान करता हूं कि वह सरकार के इस मनमानेपन के खिलाफ विद्रोह कर. देश की जनता को इस सरकार को बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिये.

क्या वह पूरी गंभीरता के साथ विद्रोह शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं, इस पर सिन्हा ने कहा कि विद्रोह कई तरह का होता है. जैसे असहयोग भी एक तरह का विद्रोह है. जनता अगर कर देना बंद कर दे तो वह भी एक तरह का विद्रोह होगा. भाजपा ने संप्रग के सहयोगी दलों को भी महंगाई के मुद्दे पर आगाह किया और कहा कि वह संसद के शीतकालीन सत्र में इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठायेगी.

बढ़ोत्तरी का मुद्रास्फीति पर असर: प्रणव

पेट्रोल कीमतों की बढ़ोत्तरी पर वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि पेट्रोल की कीमतों में हाल की वृद्धि का मुद्रास्फीति पर कुछ असर पड़ेगा. सकल मुद्रास्फीति दोहरे अंक के करीब पहुंच चुकी है. मुखर्जी ने कहा कि निश्चित रूप से मुद्रास्फीति पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा. तेल कीमतें ऊपर जा रही है और पेट्रोल नियंत्रण मुक्त है. तेल कंपनियों ने रुपये के मूल्य में गिरावट के कारण कच्चे तेल आयात की लागत में वृद्धि का हवाला देते हुए कल पेट्रोल की कीमत में 1.80 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की. इस वृद्धि के मद्देनजर दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 58.64 रुपये लीटर हो गई है. यह पूछे जाने पर कि कीमत वृद्धि को लेकर सरकार की सहयोगी दलों को अंधेरे में क्यों रखा गया, मुखर्जी ने कहा कि सरकार में कोई नहीं जानता,  क्योंकि पेट्रोल कीमतों में वृद्धि तेल कंपनियां कर रही है न कि सरकार. डीजल, केरोसीन और गैस जरूरी नियंत्रित वस्तुएं हैं.

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