देश में खाद्यान्न उत्पादनों में कमी और देश में खाद्यान्न की कमी ये दोनों ही स्थितियां अलग हैं. इस साल देश में कहीं अति वर्षा और बाढ़ तथा कहीं कम वर्षा या सूखा की स्थिति बन गई. मानसून की वर्षा अस्त व्यस्त रूप में ही चली. जहां पूर्वोत्तर, उत्तर और मध्य क्षेत्रीय राज्यों में भारी वर्षा हो गई, वहीं दक्षिण व पश्चिम भारत में वर्षा कम रही. कर्नाटक राज्य में स्थिति अल्प वर्षा की हो गई है.

इससे यह स्थिति तो लगभग हर जगह बनी है कि मानसून देर से आने और बीच में कुछ अंतराल हो जाने से बुवाई के कार्यक्रमों में अनिश्चितता और देरी की स्थिति आ गई. इसकी वजह से बुवाई के क्षेत्रों में कुछ कमी आई है. मध्य प्रदेश में सोयाबीन में कुछ अजब स्थिति बनी. मानसून की देरी से बुआई देर से हुई. वर्षा में अंतराल आने से प्रारंभ के दिनों में पानी न आने से अंकुरण भी प्रभावित हो गया और बाद में अति वर्षा से खेतों में पानी भर जाने से भी काफी फसल खराब हो गई. इस बार मानसून की तीनों स्थितियों में सोयाबीन प्रभावित हो गया.

उत्तर प्रदेश में अति वर्षा से अधिक पानी की गन्ना की फसल सुधर गई, वहीं अल्प वर्षा में महाराष्टï्र व कर्नाटक में गन्ने की फसल बिगड़ गई. शक्कर उत्पादन में उत्तर प्रदेश और महाराष्टï्र अग्रणी राज्य है, जहां उत्तर प्रदेश में शक्कर का उत्पादन बढ़ेगा वहीं महाराष्टï्र और कर्नाटक में घटेगा.

मानसून की उलट फेर में दालों, तिलहनों, कपास आदि का रकबा भी कम हुआ है, लेकिन यह स्थिति ऐसी भी नहीं है कि फसल चौपट हो गई. कृषि कार्यों में वर्षा के क्रम में ऐसी थोड़ी बहुत उलट फेर कर लगभग चला ही करती है. अब इस समय जो वर्षा हो रही है उसे सिंचाई व नमी का ही बनना बिगडऩा होगा. बुवाई का समय काफी पहले ही निकल चुका है उसमें कोई बढ़ौत्री नहीं होने वाली. इस आंकलन से अब सभी फसलों की स्थिति स्पष्टï हो चुकी है कि इस साल हर फसल में गत वर्ष की तुलना में कुछ ही कम क्षेत्र में फसलें बोई गई हैं. खरीफ का पूरा उत्पादन पिछले साल की तुलना में कम रहेगा. लेकिन इसका यह अर्थ भी कतई नहीं है कि इस साल अभाव की स्थिति बनेगी. ऐसी स्थिति को न तो बम्पर फसल कहा जायेगा और न ही सूखा पडऩा. फसलें लगभग सामान्य उत्पादन के आसपास ही कुछ कम रहेगी.

इस समय प्रश्र खाद्यान्नों के प्रबंध करने का है और यह काम सरकार का होता है. सरसरी आंकलन में यह तय है कि कर्नाटक व महाराष्टï्र में शक्कर उत्पादन कुछ या काफी कम रहेगा. लेकिन मूल्य वृद्धि इसलिए हो जायेगी कि इस कुछ कमी को बड़ी कमी होने की दहशत फैला कर सटोरिये शक्कर के भावों में अकारण ही तेजी ला देंगे. सरकार ने भी इतने बेतुके ढंग से काम किया है कि अकारण शक्कर की उपलब्धता सटोरियों के हाथों में सौंप दी.
पिछले साल शक्कर का हमारी जरूरत से ज्यादा का उत्पादन हो गया. बिना इस साल की गन्ना की फसल को देखे लाखों टन शक्कर का निर्यात कर डाला. वह न किया होता तो इस स्थिति में भी देश में शक्कर का इतना बफर स्टाक मौजूद रहता कि इस साल की होने वाली थोड़ी सी कमी का कोई असर नहीं होता. देश में किसी भी वस्तु का जरा सा भी अच्छा उत्पादन होता है और सरकार निर्यात खोलकर बैठ जाती है. इस बात का इंतजार करना ही चाहिये कि अगले साल मानसून व फसल कैसी क्या रहेगी.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

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