भुवनेश्वर, 17 अप्रैल. ओडि़शा सरकार की ओर से 29 माओवादियों और चासी मुलिया संघ के सदस्यों को रिहा करने की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद आरोपियों को जमानतदार नहीं मिल रहे. जेल में बंद ऐसे लोगों के घर में सिर्फ उनकी पत्नी और छोटे-छोटे बच्चे हैं. अन्य लोग उनकी गारंटी लेने को तैयार नहीं हैं.

25 लोगों की जमानत के लिए सरकार ने कोरापुट एवं मलकानगिरि की अदालतों में तैनात सरकारी वकीलों को निर्देश दिया है. चार लोगों की जमानत को मंजूरी मिल भी चुकी है लेकिन जमानतदार की समस्या आड़े आ रही है. राज्य के गृह सचिव यूएन बेहरा ने बताया कि सरकारी स्तर पर 18 अप्रैल से पहले 25 लोगों को रिहा कराने की कोशिश जारी है, लेकिन जमानत के मुद्दे पर उनके पास कोई जवाब नहीं. पहले 10 तारीख तक इन लोगों को रिहा करने की बात कही गई थी. बेहरा ने कहा, माओवादियों के नए संदेश से लगता है कि वे विधायक को 18 अप्रैल को रिहा कर देंगे क्योंकि माओवादी अब चेंदा भूषणम उर्फ घासी की रिहाई की मांग नहीं कर रहे हैं, जिसके खिलाफ कम से कम 55 पुलिसकर्मियों की हत्या करने का आरोप है.

इतालवी नागरिक बोसस्को पाओलो की रिहाई में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले दंडपाणि मोहंती ने सुझाव दिया है कि सरकार सीआरटीसी की धारा 321 के तहत इन लोगों के खिलाफ दर्ज मामले वापस ले सकती है. इससे जमानत की जरूरत नहीं होगी और वे मुक्त हो जाएंगे. इस बीच ओडि़शा सरकार ने एक बार फिर से अपहृत विधायक झिन्न हिक्का की सुरक्षित रिहाई की माओवादियों से अपील की है. गृह सचिव ने आशा जताई है कि माओवादी 55 पुलिसकर्मियों के हत्यारोपी कुख्यात माओवादी घासी को जेल से छोडऩे के लिए जोर नहीं देंगे.

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