मावठे की वर्षा भी एक विचित्र स्थिति है जो वरदान और अभिशाप दोनों है. ठंड में उस समय आती है जब खेती को पानी की बहुत सख्त जरूरत होती है. किसान इसे पानी नहीं बल्कि सोना बरसना कहते हैं. इससे फसलों के लिये सिंचाई के बाद काफी लंबे अर्से तक जमीन में नमी बनी रहती है. फसलें इतनी अच्छी हो जाती हैं कि पैदावार बहुत बढऩे से किसान संपन्न हो जाता है. यह ठंड के मौसम की वर्षा है, तो अपने साथ कई स्थानों पर ओले भी लाती है.

जहां ज्यादा ओला वृष्टि हो जाती है, वहां यह अभिशाप है और तबाही ला देती है. जब उत्तर भारत में हिमपात और तेज सर्दी पड़ती है तब मध्य प्रदेश में मावठे की वर्षा की जलवायु बनती है. इसीलिये राज्य के उत्तरी जिलों ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, टीकमगढ़, दमोह, सागर तरफ उत्तर के भागों में हिमपात असर से मावठा वर्षा आ जाती है. इस साल दक्षिण भारत में ‘थाने’ नाम का चक्रवाती तूफान आने से भी उसके प्रभाव से भी राज्य के दक्षिणी व मध्य जिलों में भी बादल और वर्षा भी आ गई. आलों से भिंड, मुरैना, ग्वालियर, सीहोर, होशंगाबाद, बैतूल, गुना, राजगढ़ में काफी तबाही आ गई. गन्ना व गेहूं की फसलें ओलों की मार से आड़ी हो गईं. मावठे की बरसात लगभग पूरे क्षेत्र में हो रही है.  ठंड का प्रकोप अभी और कई दिन कायम रहने वाला है. इससे वर्षा के अलावा ओले भी गिर सकते हैं. रीवा व शहडोल क्षेत्र में भी ओले गिरने की आशंका व्यक्त की गई है. शासन ओला वृष्टि से नुकसान का आंकलन भी शुरू कर देना चाहिये.

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