मायावती ने अल्पसंख्यकों को रिझाने फिर फेंका पांसा

लखनऊ, 30 नवंबर. उत्तर प्रदेश के चुनावी महाभारत में मुस्लिम वोटों को अपने पाले में लाने के लिए सूबे की मुख्यमंत्री मायावती ने पासा फेंक दिया है. मायावती ने एक बार फिर से प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी है, जिसमें उन्होंने जनसंख्या के हिसाब से मुसलमानों को आरक्षण देने की मांग की है.

मायावती इससे पहले भी प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर ऊंची जाति के गरीबों के लिए भी आरक्षण देने की मांग कर चुकी है. मुस्लिम आरक्षण के मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन की चिट्ठी का जवाब देते हुए कहा है कि उनकी सरकार मुस्लिम समुदाय की बेहतरी के लिए हमेशा काम करती रहेगी. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने 24 नवंबर को प्रधानमंत्री को एक बार फिर लिखे पत्र में उनकी सरकार द्वारा मुसलमानों के उत्थान और कल्याण के लिए किए गए कार्यों का जिक्र किया.

मायावती ने कहा कि वर्ष 1995 में पहली बार सत्ता में आने के बाद से ही बीएसपी विभिन्न चरणों में अन्य पिछड़े वर्गों के लिए लोक सेवाओं में आरक्षण व्यवस्था के तहत मुस्लिम समुदाय के पिछड़े वर्गों को जाति प्रमाण पत्र देने की व्यवस्था की गई है. गौरतलब है कि मायावती ने 14 सितंबर को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उनसे मुसलमानों को आबादी के लिहाज से आरक्षण देने का आग्रह किया था. मनमोहन सिंह ने गत 24 अक्टूबर को उस पत्र के जवाब में कहा है कि मुख्यमंत्री कर्नाटक, केरल और आंध, प्रदेश की तर्ज पर अपने राय में मुसलमानों को आरक्षण देने का कदम उठा सकती हैं. प्रधानमंत्री ने पत्र में उम्मीद जताते हुए कहा है कि आंध, प्रदेश, कर्नाटक तथा केरलकी सरकारों के उदाहरणों पर विचार करके उत्तर प्रदेश में भी ऐसे ही कदम उठाने पर गौर करेंगी. मायावती ने अपने जवाबी पत्र में प्रधानमंत्री की इस राय पर कुछ नहीं कहा लेकिन यह जरूर लिखा कि उनकी सरकार अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए अत्यंत संवेदनशील और कटिबद्ध है.

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