लखनऊ. करप्शन समेत तमाम आरोपों से घिरी उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार एक ऐसा रेकॉर्ड भी बना चुकी है, जिसे कोई दूसरी सरकार शायद ही तोड़ पाए! यूपी के राजनीतिक इतिहास में पहली बार है जब पूर्ण बहुमत वाली सरकार के 21 मंत्रियों को मर्डर, रेप और करप्शन के मामलों में अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी. और अभी लाइन में कई और मंत्री भी हैं.

बुधवार को माया ने अपने दो और मंत्री बर्खास्त किए थे. मायावती ने गर्वनर बीएल जोशी को एक लेटर देकर अपने दो मिनिस्टर यशपाल सिंह व अकबर हुसैन को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की सिफारिश की, इसे राजभवन ने बुधवार शाम को मंजूरी दे दी. इन दो मंत्रियों को मिलाकर माया ने अब तक 21 मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया है.

अभी दो और की है बारी
इन दोनों मंत्रियों पर करप्शन का आरोप था. मायावती अभी दो और मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर करने वाली हैं. इनमें चंद्रदेव राम यादव का नाम प्रमुख है. कारण है कि लोकायुक्त ने बुधवार को ही यादव को दो स्थान से वेतन लेने व करप्शन के एक मामले को जांच में सही पाया और यादव को उन्होंने मंत्री पद से हटाने के लिए मायावती को अपनी सिफारिश भेजी है.

माया की चुनावी चाल
विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही पार्टी की छवि को सुधारने के लिए माया ने मंत्रियों पर बर्खास्तगी का ‘हंटर’ चलाना शुरू किया. मायावती सरकार के ताकतवर मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी समेत प्रदेश के करीब 13 मंत्री और 28 विधायक इस वक्त भ्रष्टाचार तथा कई अन्य आरोपों में लोकायुक्त की जांच का सामना कर रहे हैं. लोकायुक्त के मुताबिक अभी जिन मंत्रियों के खिलाफ जांच चल रही है, उनमें वरिष्ठ मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी, राम अचल राजभर, फागू चौहान, अब्दुल मन्नान, दद्दू प्रसाद, फतेह बहादुर सिंह, जयवीर सिंह, राम प्रसाद चौधरी, सदल प्रसाद, अयोध्या प्रसाद पाल और विनोद सिंह प्रमुख हैं.

किस-किस की छुट्टी
मायावती को पहला झटका उस समय लगा जब उनके मंत्रिमंडल के सदस्य आनंद सेन यादव रेप और मर्डर के मामले फंस गए. उन्हें उस समय गिरफ्तार किया गया जब वह माया से मिलने उनके आवास पर गए थे. आनंद सेन यादव फैजाबाद की लॉ स्टूडेंट छात्रा शशि हत्याकांड मामले में इस समय उम्रकैद की सजा काट रहा है. पूर्व कारागार मंत्री जमुना प्रसाद निषाद को भी कई आपराधिक मामलो में शामिल पाए जाने के कारण मंत्री पद गंवाना पड़ा था. उनका निधन हो चुका है. राजधानी लखनऊ में हुए मुख्य चिकित्साधिकारियों डॉक्टर विनोद कुमार आर्या और डॉक्टर बी. पी. सिंह तथा जिला जेल में उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर वाई. एस. सचान की हत्या व राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) में हजारों करोड़ रुपये के घपले के मामले में सीबीआई जांच के घेरे में आए दो मंत्रियों बाबू सिंह कुशवाहा और अनंत मिश्र उर्फ अंटू को पद से इस्तीफा देना पड़ा. लोकायुक्त की जांच के घेरे में आए धर्मार्थ कार्य राज्यमंत्री राजेश त्रिपाठी, दुग्ध विकास मंत्री अवधपाल सिंह, माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र, श्रम मंत्री बादशाह सिंह, अंबेडकर ग्राम विकास राज्यमंत्री रतन लाल अहिरवार, उच्च शिक्षा मंत्री राकेशधर त्रिपाठी, होमगार्ड्स राज्यमंत्री हरिओम उपाध्याय, पिछड़ा वर्ग विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अवधेश वर्मा तथा कृषि शिक्षा मंत्री राजपाल त्यागी को भी कुर्सी गंवानी पड़ी.

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