लखनऊ, 2 अप्रैल. प्रदेश सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के शासनकाल की आबकारी नीति जारी रखने का फैसला किया है। नए वित्तीय वर्ष में भी पुरानी आबकारी नीति में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है।

सरकार का कहना है कि यह फैसला राजस्व हित में लिया गया है। इस फैसले से भी शराब के दामों में 15 फीसदी तक की वृद्धि संभावित है। राज्य सरकार ने फिलहाल आबकारी नीति में किसी तरह का संशोधन न करने का फैसला किया है। असल में, मायावती के शासन काल में एक साथ दो साल की आबकारी नीति बना दी गई थी। इसके साथ ही पूरे साल की फीस भी वसूल ली।  खास बात यह कि जो फीस मार्च 2012 में जमा कराई जानी थी वह चुनाव की व्यस्तता के नाम पर नवंबर में ही जमा करा ली गई। पिछली सरकार के इस कदम से बड़े शराब व्यापारी पोंटी चड्ढा के हितों की रक्षा हुई। कारण यह कि जब दूसरे साल की भी फीस पहले ही जमा करा ली गई तो नई सरकार को कोई कदम उठाने से पहले फीस की अवधि के समाप्त होने की प्रतीक्षा करनी होगी, बशर्ते कैबिनेट स्तर से पुरानी नीति में संशोधन करने का फैसला न लिया जाए। पुरानी सरकार द्वारा आबकारी नीति को दो सालों के लिए तय करते हुए लाइसेंस फीस भी वसूल लिए जाने के बाद नई सरकार के पास इसके संशोधन के लिए कैबिनेट की स्वीकृति लेने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बच रहा था। इसके अलावा पूरी नीति में संशोधन के बजाय कुछ खास मुद्दों पर संशोधन की मांग हो रही थी। नीति में संशोधन न होने की दशा में देशी व अंग्रेजी दोनों के ही दामों में तकरीबन 15 फीसदी की बढ़त होनी संभावित थी। जबकि संशोधन की दशा में वृद्धि के कुछ कम होने की संभावना थी।

राजस्व हित में नोटिफि केशन
राजस्व हित में वर्तमान आबकारी नीति को पुनरीक्षित किया जाना है। जब तक सक्षम स्तर से इस बारे में निर्णय या अनुमोदन नहीं हो जाता है, तब तक राजस्व हित में वित्तीय वर्ष समाप्ति के दृष्टिगत तद्संबंधी नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। चालू आबकारी नीति पर समय से पुनर्विचार कर लिया जाएगा। ..जावेद उस्मानी, मुख्य सचिव उप्र (सरकार की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक)

Related Posts: