नयी दिल्ली, 17 नवम्बर. उत्तर प्रदेश को बांटकर चार नए राज्य बनाने का मुख्यमंत्री मायावती का फैसला भले ही चुनावी हो, लेकिन इस घोषणा से उन्होने विरोधी दलों को सकते में डाल दिया है. कांग्रेस समेत कई दल चाहकर भी इसका खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे हैं. जबकि छोटे राज्यों का समर्थन करती रही भाजपा पसोपेश में पड़ गई है. राष्ट्रीय लोकदल जैसे बसपा विरोधी पार्टियों ने भी प्रदेश सरकार के इस फैसले को देर से उठाया गया सही कदम करार दिया है.

उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल गरमाने के बीच मायावती सरकार के अकस्मात लिए गए इस फैसले से कांग्रेस तो जैसे असमंजस में पड़ गई है. माया सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस ने साफ कहा है कि किसी एक चुनाव या तात्कालिक फायदे के लिए पार्टी फैसले नहीं करती. यह बहुत संवेदनशील मामला है. उत्तर प्रदेश का अपना एक स्वर्णिम इतिहास है. लिहाजा इस तरह का फैसला सोच-समझकर, गंभीर विचार-विमर्श के बाद लेना चाहिए. गौरतलब है कि मायावती इस मसले पर पहले ही  प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख चुकी हैं. कांग्रेस तब बचाव में कहती रही है कि मायावती गंभीर हैं.

तो उन्हें इस पर विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजना चाहिए. लेकिन जब मयावती ने ऐसा करने की घोषणा की हैं  तब से कांग्रसियों के चेहरे पर तनाव साफ दिख रहा है. मायावती ने लखनऊ में यह भी एलान किया कि उनकी सरकार इसी महीने विधानसभा से इसका प्रस्ताव पारित कराकर केंद्र को भेजने जा रही है. जबकि कैबिनेट प्रदेश को चार राज्यों में बांटने का फैसला कर चुकी है. इस संबंध में भाजपा की स्थिति भी असमंजस की है . भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा-ऐसे फैसले मायावती के चुनावी स्टंट हैं. इतने दिनों तक प्रदेश विभाजन के लिए न तो अध्ययन हुआ और न ही कोई समीक्षा. राज्य ऐसे नहीं बनते. इस प्रस्ताव के समर्थन या विरोध पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि फिलहाल तो तेलंगाना के गठन की मांग हुई है और उस पर केंद्र को फैसला लेना है. उत्तर प्रदेश पर जब विधानसभा में प्रस्ताव आएगा, तब चर्चा करेंगे. उधर, राष्ट्रीय लोकदल मुखिया चौधरी अजित सिंह ने कहा-यदि उत्तर प्रदेश के विकास को लेकर मायावती गंभीर हैं तो इस फैसले में इतनी देरी क्यों हुई? इसके पीछे उनकी चुनावी फायदे की मंशा छिपी है. फिर भी, रालोद शुरू से ही छोटे राज्यों के गठन का समर्थन करता रहा है, लिहाजा वह उत्तर प्रदेश के विकास के लिए इसके पक्ष में है. लोकमंच पार्टी के अध्यक्ष अमर सिंह ने मायावती के इस फैसले के लिए उन्हें बधाई दी है. उन्होंने कहा-प्रदेश बंटवारे पर मायावती सरकार का प्रस्ताव पारित करना चार राज्यों के गठन के विधायी प्रक्रिया का पहला पड़ाव है. अब केंद्र सरकार तत्काल उस पर काम नहीं करती तो राजनीतिक ठीकरा उसके सिर फूटेगा. यानी कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि मायावती का दांव सबको सकते में डाल दिया है.

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