नई दिल्ली, 17 अप्रैल. दिल्ली नगर निगम चुनाव में भाजपा नवगठित तीनों निगमों पर कबिज होने की ओर बढ़ रही है. हालांकि इनमें से एक निगम में भाजपा को अन्य सदस्यों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है. उत्तर और पूर्वी नगर निगम में भाजपा को बहुमत मिल गया है, वहीं दक्षिणी निगम में वह सबसे बड़ी पार्टी बनती दिख रही है और उसे निर्दलीयों के समर्थन से जरूरी संख्या हासिल करने की उम्मीद है.

राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी तीन निगमों के 272 में से 211 वार्डों के परिणामों की घोषणा की है, जिसमें से भाजपा को 109 वार्डों में जीत मिली है और कांग्रेस को 63 सीटें हासिल हुई हैं. बसपा को 13 सीटें, रालोद को तीन, राकांपा और सपा को दो-दो तथा जद-यू एवं इनेलो को एक-एक सीट पर जीत हासिल हुई है. 17 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार जीत गए हैं. रविवार को नगर निगम के 272 वार्डों के लिए मतदान हुआ था. प्राप्त रूझानों के मुताबिक, दक्षिण दिल्ली नगर निगम में भाजपा 104 वार्डों में 43 पर या तो बढ़त बनाए हुए है या जीत दर्ज की है. जबकि कांग्रेस 30 सीटों पर आगे चल रही है. अश्चर्यजनक रूप से इस क्षेत्र में अन्य उम्मीदवार 26 सीटों पर आगे चल रहे हैं. पूर्वी दिल्ली में 64 वार्डों में भाजपा 34 पर बढ़त बनाए हुए है जबकि कांग्रेस 26 वार्ड में आगे चल रही है. उत्तरी दिल्ली नगर निगम के 104 वाडरें में भाजपा 61 वार्डों में बढ़त बनाए हुए है, वहीं कांग्रेस 16 सीटों पर आगे चल रही है. राज्य निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शहर भर में 33 केंद्रों पर 272 वार्डों के लिए मतों की गिनती का काम चल रहा है.

‘नतीजों से कांग्रेस विरोधी रुख स्पष्ट’

पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा कि ये परिणाम कांग्रेसी विरोधी जन भावना का पक्का सुबूत हैं और उनका दल आगामी दिल्ली विधानसभा तथा लोकसभा चुनावों में भी विजयी होगा. गडकरी ने दावा किया कि पंजाब, गोवा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और अब दिल्ली में हाल में हुए विधानसभा तथा स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस विरोधी महौल साफ नजऱ आ रहा है.

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