इस्लामाबाद, 22 नवंबर. गोपनीय ज्ञापन [मेमोगेट] विवाद के केंद्र में आए अमेरिका में पाकिस्तानी राजदूत हुसैन हक्कानी ने कहा है कि इस मुद्दे को उठाया गया, ताकि पाकिस्तान की असैन्य सरकार एवं सेना को एक दूसरे के सामने खड़ा कर दिया जाए और उनमें कलह का बीज बोया जाए।

पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी कारोबारी मंसूर एजाज ने पिछले दिनों इस पूरे मामले को सार्वजनिक किया था। उनका दावा था कि हक्कानी के कहने पर इसी साल मई महीने में उनकी ओर से एक गोपनीय ज्ञापन अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जिम जोंस तक पहुंचाया गया था। बाद में यह ज्ञापन तत्कालीन अमेरिकी सेना प्रमुख माइक मुलेन तक पहुंचा। इस ज्ञापन में पाकिस्तानी सरकार ने तख्तापलट की आशंका के मद्देनजर कथित तौर पर अमेरिकी सरकार से मदद मांगी थी। इस मामले के सामने आने के बाद से हक्कानी विवादों में घिर गए हैं। हक्कानी ने  कहा कि एजाज की भड़काऊ बातों का मकसद पाकिस्तान की असैन्य सरकार और सेना को आमने-सामने खड़ा कर देना और कलह के बीज बोना है।

उन्होंने अमेरिका-पाकिस्तान रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए बहुत मेहनत की है और इस मामले में किसी भी तरह की जांच एवं आरोप का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वह मंसूर एजाज के खिलाफ मुकदमा करने की तैयारी कर रहे हैं। हक्कानी ने कहा कि वह अपना पद छोडऩे के लिए मानसिक तौर पर तैयार थे और उन्होंने अब राजदूत पद पर नहीं रहने का फैसला कर लिया है। अतीत में वह राजदूत बनने के इच्छुक नहीं थे और आज भी वह इस जिम्मेदारी को निभाने की इच्छा नहीं रखते हैं। पाकिस्तान राजदूत ने कहा कि मैं पाकिस्तान से मोहब्बत करता हूं, जबकि एजाज पाकिस्तान को सबक सिखाने की बात करता है. एजाज के नजरिया पाकिस्तान विरोधी है। उधर, एजाज ने पहले के अपने रुख में बदलाव करते हुए दावा किया है कि इस पूरे विवाद में पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की कोई भूमिका नहीं है।

अमेरिका में पकिस्तानी राजदूत हक्कानी का इस्तीफा

इस्लामाबाद। गोपनीय ज्ञापन मामले में अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत हुसैन हक्कानी का इस्तीफा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी ने मंजूर कर लिया है। हक्कानी को तीन दिन पहले पाकिस्तान वापस बुलाया गया था और जब उन्होंने अपना विचार रखने के लिए देश के शीर्ष सैन्य और असैन्य नेतृत्व से मुलाकात की तो प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी ने उन्हें पद छोडऩे का आदेश दिया। पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के करीबी माने जाने वाले 55 वर्षीय हक्कानी को पद छोडऩे पर विवश करने वाले इस कदम को सरकार और सेना के बीच टकराहट के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा संभवत: यह सेना की जीत भी है। हक्कानी के भविष्य पर हुई बैठक में राष्ट्रपति जरदारी, सैन्य प्रमुख जनरल अशफाक कयानी और आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शुजा पाशा शरीक हुए थे।

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