भोपाल, 4 मई. नक्सलियों की कैद से रिहाई के अभी कुछ घंटे भी नहीं बीते कि छत्तीसगढ़ की सरकार ने शुक्रवार को सुकमा जिले के कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन से जिले का पदभार फिलहाल वापस ले लिया गया है.

आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि दंतेवाड़ा जिले के कलेक्टर ओ. पी. चौधरी को अगले आदेश तक सुकमा का अतिरिक्त पदभार सौंपा गया है. 2006 बैच के आईएएस ऑफिसर एलेक्स पॉल मेनन सुकमा जिले के पहले कलेक्टर थे. फिलहाल उन्हें अगले कुछ दिन छुट्टी पर रहने के लिए कहा गया है. गौरतलब है कि मेनन को जिले के एक गांव से नक्सलियों ने 21 अप्रैल को अगवा कर लिया था और 12 दिन कैद में रखने के बाद उन्हें गुरुवार को रिहा किया गया.
गौरतलब है कि नक्सल प्रभावित इलाके दंतेवाड़ा से अलग करके इसी साल जनवरी में सुकमा जिले को बनाया गया था. 2010 में दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने एक बड़ी वारदात को अंजाम देते हुए सीआरपीएफ के 75 जवान की हत्या कर दी थी. इस घटना में कुल 76 लोग मारे गए थे.

नक्सलियों से कोई डील नहीं

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह और माओवादियों के मध्यस्थों ने शुक्रवार को कहा कि मेनन की रिहाई के लिए कोई गुप्त समझौता नहीं किया गया है और न ही रिहाई के लिए सरकार और नक्सलियों के बीच माओवादियों को छोडऩे का कोई सौदा हुआ है. यह पूछने पर कि क्या नक्सलियों और सरकार के बीच किसी तरह का करार हुआ है, इस पर मुख्यमंत्री सिंह ने संवाददाताओं से कहा, मेनन की रिहाई को लेकर नक्सलियों से किसी तरह की कोई सीक्रेट डील नहीं की गई है.

वहीं, मेनन की रिहाई में अहम भूमिका निभाने वाले माओवादियों के दो मध्यस्थों बी. डी. शर्मा और प्रो. हरगोपाल ने भी सुकमा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस बात से इनकार किया कि कलेक्टर की रिहाई के लिए किसी तरह की डील हुई है. सरकार की ओर से एक मध्यस्थ एस. के. मिश्रा ने भी स्पष्ट तौर पर कहा कि कोई सौदा या समझौता नहीं हुआ है. उन्होंने राज्य सरकार और माओवादी मध्यस्थों के बीच हुए समझौते का हवाला देते हुए कहा, सबकुछ लोगों के सामने है. इस समझौते के तहत सरकार अपने मध्यस्थों में से एक निर्मला बुच के नेतृत्व में उच्चाधिकार प्राप्त कमिटी की स्थापना करने पर सहमत हुई है, जो माओवादियों की मांगों से संबंधित मामलों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की जेलों में बंद सभी कैदियों के मामलों की समीक्षा करेगी.

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