सोमवार को दुआ के साथ हुआ इज्तिमा का समापन

या अल्लाह हम सब पर रहम, करम फरमा और हमको हिदायत अता कर दे-आमीन

भोपाल, 12 दिसंबर. राजधानी के इस्लाम नगर घासीपुरा इज्तिमागाह में तीन दिनों से जारी 65वां आलमी तब्लीगी इज्तिमा सोमवार को रूहानी और खुशनुमा माहौल में सामूहिक दुआ के बाद सम्पन्न हो गया. सुबह से इज्तिमागाह की ओर दुआ में शामिल होने के लिए स्थान पाने के लिए भारी भीड़ उमड़ रही थी.

इज्तिमागाह और आसपास सड़कों, खेतों में बैठे इंसानों के सिरों पर टोपियां ही नजर आ रही थीं. या अल्लाह सारी दुनिया में ईमान का बोलबाला कर दे और बेईमानी-बेदीनी का खात्मा फरमा दे, ऐ अल्लाह हक की मदद फरमा, या अल्लाह रहमत वाली फिजा बना दे, ऐ अल्लाह सारी दुनिया में अमन-शांति को कायम फरमा और इंसानों के दिलों में एक-दूसरे के लिये प्यार-मोहब्बत का जज्बा पैदा फरमा दे. परवर दिगार-ए-आलम हमें सच्चाई के रास्ते पर सारी जिन्दगी चलने की तौफीक अता फरमा दे. बारगाहे इलाही में यह दुआ आज विश्व भर से आये कोई दस लाख लोगों ने आलमी तब्लीगी इज्तिमा के समापन अवसर पर आलमी तब्लीगी मरकज दिल्ली के हजरत मौलाना सअद हसन साहब कांधलवी की आवाज पर पुरजोर ‘आमीन’ कहकर मांगी. दुआ के बाद हजरत मौलाना सअद हसन से मुसाफा करने के बाद जमातों में शामिल लोग अल्लाह के रास्ते में इस्लाम की तबलीग के लिये रवाना होंगे. इस इज्तिमाई दुआ के पूर्व इस्लाम के मशहूर चिंतक मौलाना अब्दुल मलिक ने भी अपनी इमान अफरोज तकरीर फरमाई और मजमे को जोडऩे का काम किया.

दावत और इबादत दोनों जरूरी है : हजरत मौलाना सअद-
दुआ से पहले हजरत मौलाना सअद ने अपनी असर अंदाज तकरीर में फरमाया कि दुनिया में इंसान की जिन्दगी चंद दिनों की है, लेकिन मरने के बाद शुरू होने वाले अजर-अमर जीवन का दारोमदार आमाल पर है. अगर इंसान दुनिया में नेकी और भलाई, ईमान वाली जिन्दगी गुजार कर जायेगा, तो उसका ठिकाना जन्नत है और बुराई वाली जिन्दगी गुजार कर जायेगा तो उसका ठिकाना जहन्नुम है. हजरत मौलाना सअद साहब ने फरमाया कि अल्लाह पाक मुल्क-ओ-माल से खुश नहीं होता या हुकुमत, विजारत या तिजारत और मुलाजिमत से कतई खुश नहीं होता बल्कि अल्लाह पाक अपने हुक्मों की तामील करने वाले और हमारे नबी-ए-पाक हजरत मोहम्मद (स.अ.व.) के बताये तरीके पर जिन्दगी गुजारने वालों से बेहद खुश होता है. दुआ कोई 29 मिनट तक बदस्तूर जारी रही.

मशहूर आलिम-ए-दीन जमाअत-ए-तब्लीग के प्रमुख मौलाना सअद साहब ने इज्तिमागाह में मौजूद इंसानों को संबोधित करते हुये फरमाया कि पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद (स.अ.व.) के बाद अब कोई नबी दुनिया में नहीं आने वाला. अब उम्मतियों को ही दीन-ए-इस्लाम का पैगाम सारी दुनिया में पहुंचाना है. अब जो इंसान ईमान-ओ-यकीन की जितनी मेहनत करेगा तो अल्लाह पाक उसे उतना ही ताकतवर बनायेगा और उसके मांगने पर अल्लाह पाक की मदद और नुसरत उसके पास आयेगी. अल्लाह पाक अपने प्यारे नबी की उम्मती की हर जरूरत को पूरा करेगा. दुआ से पहले मौलाना सअद साहब ने जमाअतों की शक्ल में अल्लाह की राह में जाने वालों को खिताब करते हुये फरमाया कि हिजरत-ओ-नुसरत से ही दीन जिन्दा होता है. उन्होंने फरमाया कि दुआ सिर्फ अपने लिये नहीं बल्कि पूरी दुनिया के हर एक इंसान की बेहतरी और भलाई के लिये अल्लाह पाक से मांगनी चाहिये.

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