भारत में विदेशी बैंकों में जमा काला धन को लेकर ‘ताल ठोंक’ राजनीति हो रही है, लेकिन मध्य प्रदेश में अवैध खनन का काला धंधा ”सीना ठोंक कर”  हो रहा है. ज्यादातर इसमें सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेता लिप्त पाये जा रहे हैं. अवैध खनन मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा संगठित गिरोहों का आपराधिक स्थाई उद्योग का रूप ले चुका है. जे.बी.सी. मशीनों, ट्रकों की कतार, मजदूरों के फौज में खुले आम यह काम हो रहा है. मुरैना में एक पुलिस अफसर पत्थर ट्राली पकडऩे में कुचल कर मारा गया.

उसी समय यह भी उजागर हुआ कि भिंड में भाजपा के उपाध्यक्ष के ट्रक ट्राली अवैध खनन में जब्त किये गये थे, लेकिन उन्होंने सीना ठोंक कर जब्त करने वाले खान इन्सपेक्टर की पिटाई की और थाने जाकर अपने जब्त रखे वाहन चुनौती देकर वापस भी ले गये और कोई कुछ नहीं कर पाया. जब मुरैना कांड हुआ तब उस होहल्ले में उसे पकड़ा गया और वाहन फिर से जब्त किये गये. हर नदी में रेत का खुले आम अवैध खनन हो रहा है. रेत, मुरम, गिट्ïटी, गिट्ïटा, व मिट्ïटी माफिया सबसे दबंग और राजनैतिक संरक्षण का बना हुआ है. उनकी राजनीति खुले आम इतनी ही होती है कि  नेता व अधिकारी अपने हिस्से की रिश्वत लेते जायें और उनका काला धंधा चलने दें और यह हो भी रहा है.

सतना जिले में मध्य प्रदेश की उत्तर प्रदेश से लगी सीमा के पास केन नदी में पुलिस थाना अधिकारी की भागीदारी से रेत का निर्यात हो रहा था. उसके लिये नदी पर अवैध पुल भी बना हुआ था. यह सब छोटे पैमाने व स्तर पर हो ही नहीं सकता. यह कितना बड़ा काला धंधा है इसका अंदाजा हो सकता है कि छतरपुर जिले के महाराजपुर थाना क्षेत्र में एक छोटे से रोड साइड रेलवे स्टेशन सिंगपुर में एक ऐसे ही   दबंग ठेकेदार ने एक करोड़ रुपये से एक पूरी मालगाड़ी बुक करा ली. इसमें लोड करने के लिये 100 ट्रक रेत उस स्टेशन में लाइन के पास जमा कर दी, जिसके जरिये रेत उत्तर प्रदेश में 11 जून को भेजी जानी थी. यह भी चर्चा में है कि एक खनन माफिया के पास 900 जेबीसी मशीनें हैं, जो वह अवैध खनन के लिये लोगों को किराये पर देता है. भवन निर्माण की भारी गतिविधियों में ईंट की बहुत मांग है. इसके लिये अवैध भट्टों व अवैध मिट्टी खनन जोरों पर है.

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