सरकार ने दिखाई सड़कों को सुधारने की सक्रियता

भोपाल, 29 सितंबर.प्रदेश की खस्ताहाल सड़कों से दिनों दिन हो रही राज्य सरकार कि किरकिरी से सरकार ने इस मुद्दे पर गंभीर रुख इख्तियार कर लिया है. मौजूदा भारतीय जनता पार्टी की सरकार यह भी बखूबी जानती है कि इन्हीं खराब सड़कों के दम पर उन्होंने बीते चुनाव में कांगे्रस की तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार को उखाड़ फैंका था. अब सात साल बीतने के बाद इस बार गेंद ने पाला बदल लिया है. यहीं कारण है कि शिवराज सरकार ने अब प्रदेश की सड़कों को सुधारने के लिए सक्रियता दिखाना शुरू कर दिया है.

हालांकि भाजपा सरकार कई बार खराब सड़कों को लेकर केंद्र सरकार पर भेदभाव बरतने का आरोप लगा चुकी है, लेकिन इतना तो तय है कि सड़कें के कारण सबसे ज्यादा नुकसान अगर होगा तो वो राज्य सरकार का ही होगा. यही बात ध्यान में रखकर अब सरकार ने राज्य सरकार के स्वामित्व वाली सड़कों को सुधारने के लिए गंभीरता दिखा दी है. सरकार के मंत्री और भाजपा के विधायक भी सड़कों की समस्या को गंभीरता से ले रहे हैं और उन्होंने भी अपने क्षेत्रो की सड़कों की मरम्मत आगामी चुनाव के पहले ही करा लेने के लिए कमर कस ली है. खराब सड़कों के कारण हो रही समस्या से जहां जनता में आक्रोश बढऩे लगा है वहीं प्रदेश के विपक्षी दल कांग्रेस ने भी बीते दिनों प्रदेश भर में आंदोलन चलाकर सरकार को मुश्किल में डालने की कोशिश तेज कर दी है.

कांग्रेस जहां सड़क को बढ़ा मुद्दा बनाकर आगामी चुनाव में भाजपा सरकार को पटकनी देने के मंसूबे बना रही है, वहीं भाजपा के थिंक टैंकों को भी इस बात का बखूबी अंदाजा हो गया है कि अगर समय रहते प्रदेश की सड़कें नहीं सुधरी तो फिर मिशन 2013 की राह आसान नहीं होगी. यहीं कारण है कि विगत दिनों सरकार द्वारा सोमवार को बीओटी एवं एन्यूटी के तहत मंजूर 3526 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए. इस भारी भरकम बजट से प्रदेश की 69 सड़कों को सुधारा जाएगा.

इतना ही नहीं इसके बाद भी सड़कों को लेकर आगामी दिनों में प्रदेश की जनता तो राज्य सरकार से कई और सौगात मिल सकती है. हालांकि यह बात और है कि विगत सोमवार को स्वीकृत हुई राशि में से बनने वाली ज्यादातर सड़कें भाजपा के कद्दावर मंत्रियों या भाजपा विधायकों के क्षेत्र के लिए स्वीकृत की गई हैं. इसके पीछे का कारण भी स्पष्टï है कि सभी अपने क्षेत्र की जनता से मिल रही शिकायतों को दूर करने के लिए गंभीर हो गए हैं. कोई भी यह नहीं चाहता कि आगामी चुनाव में तो कम से कम सड़क जैसे मुद्दे पर फजीहत हो. यहीं एकमात्र वजह है कि चीन दौरे से लौटने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने प्रदेश की खस्ताहाल सड़कों पर ध्यान केन्द्रित किया है.

प्रदेश की सड़कों के लिए हाल ही में हुई कैबिनेट की बैठक में राज्य सरकार स्वामित्व वाली सड़को की मरम्मत और निर्माण की मंजूरी दी गई है. सूबे के मुखिया भी यह बात बखूबी जानते है कि जिस दमदार टीम के सहारे वह मिशन 2013 को जीतने के लिए तैयारी कर रहे हैँ उनको अपने क्षेत्र में मजबूत करना सबसे पहली जिम्मेदारी है. इसी लिए कैबिनेट बैठक में कई मंत्रियों को पहली किश्त में सड़क की चिंता से मुक्ति मिली है. इसमें कृषि मंत्री रामकृष्ण कुसमारिया, स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा, संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा,वित्त मंत्री राघव जी, महिला बाल विकास मंत्री रंजना बघेल, पशुपालन मंत्री अजय  विश्रोई, पंचायत मंत्री गोपाल भागर्व, आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह, वन मंत्री सरताज सिंह, राज्य मंत्री देव सिंह सैयाम और बृजेन्द्र प्रताप सिंह शामिल हैं.

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