गुना 21 मार्च नससे.  प्रदेश स्तरीय छानबीन समिति द्वारा सांसी जाति के प्रमाण-पत्र को निरस्त करने के दिए गए निर्णय के बाद पहले से ही आहत गुना विधायक राजेन्द्रसिंह सलूजा को छह माह के अंतराल में  दूसरा झटका झेलना पड़ा है.

इस बार हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के फैसला है, जिसमें  उनकी अपील खारिज कर दी है. इसके बाद भी श्री सलूजा की विधायकी बरकरार रहेगी.क्योकि उनके समक्ष अभी हाईकोर्ट में ही पुुनर्विचार याचिका के अवसर उपलब्ध है, साथ ही हाईकोर्ट के बाद सुप्रीमकोर्ट में भी दो अवसर  अभी बांकी हैं. वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में संासी जाति के प्रमाणपत्र के आधार पर आरक्षित विधानसभा क्षेत्र गुना से श्री सलूजा ने जनशक्ति पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ते हुए नजदीकी कांग्रेस प्रत्याशी संगीता मोहन रजक को हराया था.

इसके बाद श्री सलूजा न केवल  भाजपा में शामिल हुए,बल्कि उन्होंने बागी का दाग धोकर स्वयं को भाजपा विधायक के रूप में भी स्थापित किया और पार्टी के शीर्ष नेताओं का भी बरदहस्त पा लिया. जबकि स्थानीय स्तर पर पार्टी में उनके विरोधियों की संख्या कम नहीं है. चुनाव जीतने के बाद श्री सलूजा की मुश्किलें कम नहीं हुईं.प्रतिद्वंदी खेमे ने उनके जाति प्रमाणपत्र को चुनौती देते हुए राज्य स्तरीय छानबीन समिति के समक्ष याचिका दायर कर दी. वहीं उनके विरुद्ध धरने प्रदर्शन का भी दौर चलता रहा. इसी बीच विगत 13 सितंबर 2011 को छानबीन समिति ने श्री सलूजा के सांसी जाति के प्रमाणपत्र को अवैध करार दे दिया. इसके बाद भी वे बिचलित नहीं हुए और उन्होंने हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के समक्ष याचिका दायर करते हुए छानबीन समिति के इस निर्णय को चुनौती दी थी.जिसे स्वीकारते हुए 23 सितंबर 11 को ग्वालियर खंडपीठ के जस्टिस सुजॉय पॉल ने छानबीन समिति के निर्णय पर स्थगन दें दिया.

इसके बाद खंठपीठ के समक्ष दोनों ही पक्षों की ओर से विभिन्न साक्ष्यों के साथ अपने अपने पक्ष में दावे किए जाते रहे. विगत सोमवार को दोनों ही पक्षों के अधिवक्ताओं ने इस प्रकरण में जोरदार बहस की थी. पंाच घंटे तक बहस को सुनने को बाद जस्टिस सुजॉय पॉल ने निर्णय सुरक्षित रख लिया  था. तभी से इस निर्णय पर सभी की निगाहें टिकी हुई थी. इस दौरान अफवाहों का बाजार भी लगातार गरम रहा. विश्वस्त सूत्रों के अनुसार आज सुबह जस्टिस सुजॉय पॉल ने उक्त मामले में निर्णय सुनाते हुए श्री सलूजा की अपील खारिज कर दी है. जिससे फिलहाल छानबीन समिति द्वारा दिया गया निर्णय अस्तित्व में आ गया है. विधायकी पर फिलहाल खतरा नहीं: हाईकोर्ट द्वारा दिए गए इस निर्णय के बाद भी श्री सलूजा की विधायकी पर फिलहाल कोई खतरा नहीं है.

कानूनी जानकारों के अनुसार संवैधानिक व्यवस्था में श्री सलूजा के समक्ष अभी हाईकोर्ट में ही पुुनर्विचार याचिका के अवसर उपलब्ध है, वहीं हाईकोर्ट के बाद सुप्रीमकोर्ट में भी दो अवसर  मिलेंगे.इस तरह इन तीन चार अवसरों को देखते हुए विधायकी का कार्यकाल पूरा निकल जाने की  संभावनासे इंकार नहीं किया जा सकता. हालांकि मामला चलते रहने की स्थिति में इस निर्णय का असर आगामी विधानसभा में की जाने वाली दावेदारी पर पड़ सकता है. मनाई खुशी: हाईकोर्ट के इस निर्णय की खबर गुना में आते ही  विपक्षी गुट के लोगों ने खुशियां मनाई गईं. लक्ष्मीगंज तिराहे पर पीपल के वृक्ष के नीचे व अन्य क्षेत्रों में आतिशबाजी चलाकर व मिठाई वांटकर खुशियां मनाई गई.

Related Posts: