मनरेगा की सबसे बड़ी सफलता और कीर्तिमान यह है कि इसने ग्रामीण मजदूरों की मजदूरी में इजाफा कर दिया और उन्हें घर में काम दे दिया. काफी समय पूर्व संसद में सदस्यों ने आलोचना के रूप में यह उल्लेख किया था कि गांवों में खेती का मजदूर महंगा हो गया है और मिलता भी नहीं है. इसकी वजह यह बताई कि मनरेगा ने दी जा रहे रेट से मजदूरी दर कई गुना बढ़ा दी गई है, इतना गांवों के किसान खेती के कामों के लिये दे नहीं सकते. साथ ही अब कोई व्यक्ति मजदूरी न मिलने के कारण घर बैठा भी नहीं मिलता. मनरेगा में काम मिलता रहता है. इस कार्यक्रम ने श्रम संगठन के रूप में काम भी कर डाला. गांवों का बिखरा हुआ असंगठित मजदूर अब बिना कोई ट्रेड यूनियन बनाये मनरेगा में मजदूरों का संगठित वर्ग हो गया है.

मनरेगा के कामों से मजदूर एक ही जगह काम करने से एक-दूसरे के बहुत करीब भी आ गये हैं. वे एक-दूसरे के गहरे साथी बन गये हैं. मनरेगा से असंगठित मजदूर वर्ग का संगठित हो जाना, बिना कुछ किये मजदूरी के रेट बढ़ जाना वर्तमान आर्थिक दौर की सबसे बड़ी उपलब्धि है. मनरेगा ने एक साथ कर्ई महान उद्देश्यों को स्वत: ही पा लिया है. इसके लिये असंगठित मजदूर को कोई आन्दोलन, जलसा, जुलूस नहीं करने पड़े. मनरेगा सन् 2006 में शुरु की गई योजना है. इसकी 6वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने कहा कि इस समस्या का समाधान किया जाए कि मजदूरों को मजदूरी मिलने में देरी न हो. साथ ही उन्होंने इसमें व्याप्त भ्रष्टाचार व फंड के गबन पर सख्त कार्यवाही कर इसे खत्म करने को कहा. प्रधानमंत्री ने इसे सरकार की सफल योजना बतातेे हुए कहा कि 10 करोड़ मनरेगा मजदूरों का खाता बैंकों या पोस्ट आफिसों में खोला गया है और यहां से 81 प्रतिशत लोगों को भुगतान किया जा रह

ा है. इसके तहत 12 करोड़ लोगों को जाब कार्ड दिया जा चुका है.

केंद्र सरकार की व्यवस्थाओं में यह व्यवस्था भी है कि योजना केंद्र की, फंड केंद्र का लेकिन उस योजना का कियान्वयन राज्य सरकारें करेंगी. भ्रष्टïाचार यही हो जाता है.  केंद्र की ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की भी इसी तरह की महती जन कल्याण योजना है. उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की मायावती सरकार में ऐसा सामने आया है कि इसका पूरा फंड ही उस सरकार के स्वास्थ्य मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा से लेकर नीचे जिला तहसील व ग्राम स्तर तक भी नेता, अफसर, डॉक्टर, कर्मचारी, दवा निर्माता व विक्रेता आपसी साजिश करके खा गये. भांडा फोड़ हुआ और जांच शुरू हुई तो मंत्री कुशवाहा को बर्खास्त किया और अफसरों के मर्डर होने लगे. अब केंद्र सरकार ने न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि हर राज्य में इस योजना के  फंड सी.ए.जी. से आडिट करने का आदेश जारी किया.

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री जयराज रमेश ने मनरेगा में भ्रष्टाचार व गबन की समस्या को गंभीरता से लेते हुए इसकी योजनाओं व फंडों के बारे में व्यवस्था की है कि इनका चार्टड एकाउंटेंट आडिट करेंगे और उनके भी सी.ए.जी. और सोशल आडिट होंगे. यह निश्चित ही बहुत बड़ा कदम इसलिए है कि मनरेगा की सफलता भी इसी पर निर्भर है कि इस योजना में भ्रष्टाचार को खत्म कर दिया जाये. राज्य सरकारों पर  आमतौर पर केंद्र सरकार मंत्रियों द्वारा आरोप लगाये गये है कि केंद्र सरकार की योजनाओं का फंड राज्य सरकारें दूसरे कामों में खर्च कर देती है या इनमें इतना भ्रष्टाचार हो जाता कि पूरी योजना ही ग्रामीण स्वास्थ्य योजना की तरह दूसरी डूब जाती है.

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