नई दिल्ली, 21 सितम्बर. 2009 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की ओर से पीएम कैंडिडेट भले ही लालकृष्ण आडवाणी थे, पर मोदी समर्थक उन्हें पीएम के रूप में देखना नहीं चाहते थे। इस बारे में विकिलीक्स ने ताजा खुलासा किया है।

विकिलीक्स के ताजा खुलासे के मुताबिक, गुजरात के 2009 में नरेंद्र मोदी समर्थक नहीं चाहते थे कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी पीएम बनें। इस खुलासे में चौंकाने वाली बात यह है कि मोदी समर्थक पीएम के रूप में किसी और को नहीं बल्कि मनमोहन सिंह को देखना चाहते थे। विकिलीक्स की यह रिपोर्ट बीजेपी की अंदरूनी कलह को काफी हद तक उजागर करती है।  कुछ दिन पहले अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट आई थी जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का प्रबल दावेदार बताया गया था।

इसके बाद बीजेपी कई नेताओं ने कहा था नरेंद्र की अगुवाई में बीजेपी 2014 चुनाव में वापसी कर सकती है। इस रिपोर्ट के आने से पहले लाल कृष्ण आडवाणी को ही एनडीए गठबंधन की तरफ से पीएम इन वेटिंग बताया जा रहा था। अमेरिकी कांग्रेस की उस रिपोर्ट का समर्थन लाल कृष्ण आडवाणी भी कर चुके हैं और परोक्ष रूप से अब वह भी मान चुके हैं कि मोदी की अगुवाई में एनडीए सत्ता में वापस आ सकती है.

राजनीतिक दल प्रधानमंत्री तय करता है: संघ
नयी दिल्ली, 21 सितंबर, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने साफ कर दिया है कि भाजपा का अगला प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार कौन हो? इससे उसे कोई मतलब नहीं है. वहीं संघ ने भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी के संघ मुख्यालय जाने पर कहा कि वे मुख्यालय पहले भी जा चुके हैं.

लिहाजा इसमें नया कुछ नहीं है.आडवाणी के नागपुर स्थित संघ मुख्यालय जाने के बाद उठ रही चर्चाओं के बीच संघ नेता राममाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री कौन और कैसा होना चाहिए, बुर्जुग होना चाहिए या युवा होना चाहिए. ये सारी चीजे राजनीतिक दल तय करता है. उन्होंने कहा कि संघ को इन चीजों से कोई मतलब नहीं है. उन्होंने कहा कि संघ न तो इस मुद्दे पर मार्गदर्शन करता है और न ही इन चीजों में पड़ता है.

उन्होंने कहा कि पार्टी इन चीजों पर खुद निर्णय ले सकती है और लेने की क्षमता भी है. उन्होंने कहा कि आडवाणी के संघ मुख्यालय जाने का अर्थ नहीं खोजा जाना चाहिए. आडवाणी व संघ के बीच रथयात्रा को लेकर किसी तरह के मनमुटाव की संभावना को खारिज करते हुए राममाधव ने कहा कि इसपर कोई अंतर्विरोध नहीं है.

Related Posts: