अहमदाबाद, 18 जनवरी. गुजरात हाईकोर्ट ने लोकायुक्त नियुक्ति का फैसला बहाल करते हुए मोदी सरकार को जोर का झटका दिया है.

गुजरात हाईकोर्ट ने राज्यपाल द्वारा की गई लोकायुक्त की नियुक्ति को बरकरार रखा और इसे चुनौती देने वाली राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया. इस मामले में पहले एक खंडपीठ ने खंडित फैसला दिया था जिसके बाद न्यायमूर्ति वी.एम. सहाय को लोकायुक्त की नियुक्ति को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई का जिम्मा सौंपा गया था. न्यायमूर्ति सहाय ने कहा, ‘मैं खंडपीठ की सदस्य न्यायमूर्ति सोनिया गोकानी के उन बिंदुओं से सहमत नहीं हूं जिनमें उन्होंने मतभेद जाहिर किया है.’ उन्होंने व्यवस्था दी, ‘मैं अपने भाई न्यायाधीश अकील कुरैशी के विचारों से सहमत हूं.

‘कुरैशी ने लोकायुक्त की नियुक्ति को ‘संवैधानिक’ बताते हुए इसे बरकरार रखने का फैसला दिया था. अदालत ने कहा, ‘इसलिए सरकार की याचिका खारिज की जाती है.Ó गुजरात की राज्यपाल कमला बेनीवाल ने अवकाशप्राप्त न्यायमूर्ति आर.ए. मेहता को पिछले साल 25 अगस्त को लोकायुक्त के पद पर नियुक्त किया था. यह पद पिछले आठ साल से रिक्त पड़ा था. मुख्यमंत्री मोदी की अगुवाई में गुजरात सरकार ने राज्यपाल द्वारा लोकायुक्त की नियुक्ति किए जाने का विरोध किया था और 26 अगस्त 2011 को हाईकोर्ट में इसे चुनौती दी थी. साथ ही राज्य सरकार ने राज्यपाल के खिलाफ राजनीतिक अभियान भी छेड़ दिया था. इससे पहले 11 अक्तूबर को हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने नियुक्ति के मुद्दे पर खंडित फैसला दिया था. न्यायमूर्ति कुरैशी ने जहां राज्यपाल के फैसले को बरकरार रखा था वहीं न्यायमूर्ति गोकानी ने राज्यपाल द्वारा जारी नियुक्ति संबंधी आदेश को ‘असंवैधानिक’ बताते हुए इसे रद्द कर दिया था. गुजरात की राज्यपाल कमला बेनीवाल ने 25 अगस्त 2011 को जस्टिस आर.ए.मेहता को लोकायुक्त नियुक्त किया था. सरकार का कहना था कि राज्यपाल ने लोकायुक्त की नियुक्ति में मुख्यमंत्री की सलाह नहीं ली थी. इस संबंध में प्रदेश के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री को खत लिखकर राज्यपाल को वापस बुलाने तक की मांग की थी.

भाजपा पर कांग्रेस ने साधा निशाना

नयी दिल्ली, 18 जनवरी, नससे. कांग्रेस ने गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा अवकाश प्राप्त न्यायाधीश आर ए मेहता की लोकायुक्त के रूप में नियुक्ति को आज सही ठहराये जाने को लेकर भाजपा पर हमला बोलते हुये कहा कि इससे उसका दोहरा चरित्र फिर उजागर हो गया है.कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुये कहा कि इससे भाजपा का दोहरा चरित्र उजागर हो गया तथा इससे साफ हो गया है कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिये वह मजबूत लोकपाल के पक्ष में नहीं है. उन्होंने कहा कि भाजपा केंद्र में तो मजबूत लोकपाल की बड़ी-बड़ी बातें करती है लेकिन वह राज्य में मजबूत लोकायुक्त नहीं चाहती. कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह के मुताबिक नरेन्द्र मोदी को अभी और झटके लग सकते हैं.  हमें प्रसन्नता है कि गुजरात में 11 साल बाद लोकायुक्त संगठन अस्तित्व में आयेगा.

फैसले से भाजपा नाखुश

गुजरात के लोकायुक्त की नियुक्ति को सही बताने संबंधी वहां के उच्च न्यायालय के आज के फैसले को भाजपा ने देश के संघीय ढांचे के लिए हानिकारक बताया है. राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने इस निर्णय पर कहा कि गुजरात उच्च न्यायालय का खंडित निर्णय संघवाद के लिए हानिकारक है. राज्यपाल केन्द्र सरकार का मनोनीत व्यक्ति होता है. अगर लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर राज्यपाल को राज्य सरकार पर वरीयता दी जाती है तो यह भारत सरकार की ओर से लोकायुक्तों की नियुक्ति करने जैसा होगा. उन्होंने कहा कि ऐसा होने से लोकायुक्त और संघवाद दोनों को हानि पंहुचेगी. गौरतलब है कि गुजरात उच्च न्यायालय ने राज्यपाल की ओर से की गई लोकायुक्त की नियुक्ति को आज बरकरार रखा और इसे चुनौती देने वाली राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया.

Related Posts: