नई दिल्ली, ५ जून. मॉनसून ने केरल में मंगलवार को दस्तक दे दी और रिमझिम बरसती बूंदों से किसानों को राहत मिली. वहीं, दिल्ली में भी मौसम ने कुछ करवट बदली है. साउथ दिल्ली में ओलों के साथ तेज बारिश हुई है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि दिल्ली में अब गर्म हवाएं नहीं चलेंगी.

केरल में मॉनसून पर भारतीय मौसम विभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया, मॉनसून केरल पहुंच गया. केरल में आमतौर पर मॉनसून की बारिश एक जून से होती है लेकिन वैज्ञानिकों ने कहा कि परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि पूर्वानुमानों के अनुसार, मौसमी बारिश की प्रक्रिया अच्छी है. राष्ट्रीय जलवायु केंद्र के निदेशक और मानसून का पूर्वानुमान जताने वाले मुख्य अधिकारी डी. शिवानंद पई ने बताया, अभी तक मानसून की स्थिति बहुत अछी है और केरल तथा दक्षिणी कर्नाटक के हिस्सों में अगले दो-तीन दिनों तक बारिश होगी. मानसून के अन्य इलाकों में बढऩे के लिए अनुकूल स्थिति है. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि तूफान मवार की वजह से मॉनसून के आने में देरी हुई.

चार दिन लेट था मानसून

साल २००५ के बाद यह पहला मौका है जब वहां मानसून लेट हुआ है. इससे पहले २००५ में यह ७ जून को केरल पहुंचा था. इसके बाद हर साल मई के आखिर तक केरल पहुंच गया था. साल २००९ में तो यह २३ मई को ही वहां पहुंच गया. इस साल १ जून को मॉनसून के केरल पहुंचने के आसार थे.

दिल्ली में इंतजार

तपती दिल्ली के लोगों के मन में अब सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि मॉनसून एक्सप्रेस दिल्ली कब पहुंचेगी? मौसम विभाग के साइंटिस्ट्स कहते हैं कि इस बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि तब तक मौसम में कई बार उतार-चढ़ाव आएंगे.

पवार ने लिया जायजा

भारत की करीब ५५ फीसदी खेती बारिश पर निर्भर है. पिछले कुछ साल से मॉनसून सामान्य रहने से अनाज की बंपर पैदावार हो रही है. कृषि मंत्री शरद पवार ने हालात का जायजा लेने के लिए मौसम वैज्ञानिकों से बात की. मौजूदा फसली सीजन में अनाज की पैदावार २५ करोड़ टन तक पहुंचने के संकेत हैं. यह पिछली बार से करीब ५० लाख टन यादा है. पवार का मानना है कि पैदावार की रफ्तार बरकरार रखने के लिए मॉनसून का अछा होना जरूरी है.

बीते साल कितनी बारिश

पिछली बार देश में जून से सितंबर के बीच ८७ सेमी. बारिश हुई थी. सब ठीक रहा तो इस बार ८६ से ९३ सेमी. के बीच बारिश होने का अनुमान है. देश में १९५१ से २००० के बीच हुई वर्षा का औसत ८९ सेमी. है. सूत्रों के मुताबिक, कुछ दिक्कतों के बावजूद, इस साल मानसून के शुरुआती चार महीनों में औसत बारिश के ९० फीसदी से कम पानी बरसने के आसार कम हैं.

अल नीन्यो का नो इम्पैक्ट

साइंटिस्ट्स फिलहाल अल नीन्यो के दुष्प्रभाव को गलत बता रहे हैं. भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक लक्ष्मण सिंह राठौर का कहना है कि अभी अल नीन्यो तटस्थ स्थिति में है, ऐसे में अभी से इसके असर का आंकलन करना गलत है. देश में मॉनसून के अंतिम दौर यानी अगस्त- सितंबर में अल नीन्यो मॉनसून पर पॉजिटिव असर डालता है. फिलहाल समुद्र ऊपरी सतह के तापमान में ०.५ से ०.७ डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी देखी गई है. इससे यह साबित हो गया है है कि अल नीन्यो और मॉनसून का फिलहाल कोई सीधा संबंध नहीं है.

मानसून का ऐलान कब

वैज्ञानिकों के मुताबिक केरल में मॉनसून के पहुंचने का ऐलान तभी किया जाता है जब राय और लक्षद्वीप आईलैंड के कुल १४ ऑब्जर्वेशन स्टेशनों में ७ से लगातार ४८ घंटों तक बारिश होने की रिपोर्ट आ जाए. भारतीय मौसम विभाग के लक्ष्मण सिंह राठौर ने बताया, केरल में मॉनसून के दस्तक देने की सामान्य तारीख १ जून है, लेकिन तय डेट से ५ दिन पहले या ५ दिन बाद इसकी दस्तक सामान्य मानी जाती है, क्योंकि फोरकास्ट के मॉडल में इतना एरर आ सकता है.

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