भारत में मानसून 9 दिन की देरी से केरल पहुंचा. मध्यप्रदेश में मानसून आ गया है लेकिन उसने छुटपुट बारिश की आमद भर दी है. अभी वह पूरे शबाब पर नहीं आया है. तसल्ली इसी बात से हो रही है कि बादल छाये हुए हैं. फिलहाल न गरज रहे हैं और न बरस रहे हैं. मानसून पूर्वी तट के राज्यों में छत्तीसगढ़ और आंध्र तक बरस रहा है. राज्य के रीवा व जबलपुर संभागों तक वर्षा हो गई है. बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने से मानसूनी हवाएं उत्तर-पश्चिम होने से राज्य में मानसून का क्रम ठीक नहीं चल रहा.

खरीफ फसलों की बुवाई मानसून के समय पर आने से ठीक या देर हो जाने से अस्त-व्यस्त हो जाती है. बारिश के बाद खरपतवार उगती है, उसे साफ करने के बाद कुछ मौसम खुलने से ही खेतों की कीचड़ खत्म होने पर बुवाई होती है, इस संदर्भ में किसानों को परामर्श दिया गया है कि वे दो-तीन इंच नमी के बाद बतर (खुला मौसम) आते ही खरीफ फसलों की बुवाई करें. इस साल यह अनुमान हुआ है कि मानसून लगभग सामान्य ही रहेगा. उसमें हो सकता है कि 8 प्रतिशत की कमी रह जाये और प्रतिशत 92 तक रहे. लेकिन इतनी घट-बढ़ खेती किसानी व सामान्य लोगों के लिये चिंता का विषय नहीं होती. अभी यह अनुमान हो रहा है कि एक हफ्ते में मानसून भोपाल, इंदौर के मालवा क्षेत्र तक पहुंच जायेगा.

राज्य ने इस वर्ष लगभग 15 लाख हेक्टेयर भूमि में खरीफ फसलें लेने का लक्ष्य निर्धारित किया है. इस बार राज्य का कृषि विभाग यह प्रयोग कर रहा है कि 40 प्रतिशत बोवाई कूंड और मेड पद्घति से होगी. राज्य में खाद का भंडारण कर लिया गया है. खाद बाहर से आयात भी बराबर हो रहा है और किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान पर बीज भी दिये जा रहे हैं. तैयारी के हिसाब से मध्य प्रदेश खरीफ में भी बम्पर राज्य रहेगा.

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