इन्दौर. 24 मार्च, मध्य प्रदेश सरकार ने सभी खान-पान की चीजे बनाने व बेचने वालों के लिए नया कानून 5 अगस्त 2011 से लागू कर दिया है. इसके तहत खाद्य व औषधि प्रशासन से इन सभी को लायसेंस लेना पड़ेगा.

इस नए कानून की शर्ते कठोर व अव्यवहारिक होने से प्रदेशभर के व्यापारी इसका विरोध कर रहे हैं. हालांकि प्रशासन अभी इस पर लचिला है. सरकार ने 5 अगस्त 2012 तक छूट दे रखी. इसके बाद अगर लायसेंस नहीं बनवाए गए तो दंड के साथ सजा का प्रावधान है. और ये सब अधिकार शासन ने एडीएम को दिए है.

इन्दौर में इसका पुरजोर तरीके से विरोध करने के लिए इन छोटे-बड़े व्यापारियों ने मिलकर एक नया संगठन मध्यप्रदेश फूड प्रोडक्ट्स निर्माता एवं विक्रेता महासंघ बनाया है. महासंघ के अध्यक्ष किराना व्यापारी रमेश खंडेलवाल, महामंत्री मिठाई-नमकीन व्यापारी विकास जैन व संयोजक दाल मिल व्यापारी सुरेश अग्रवाल है. खंडेलवाल ने बताया कि इन नए कानून की शर्ते बहुत जटिल व अव्यवहारिक है. इससे छोटे-छोटे व्यापार चौपट हो जाएंगे. इसलिए जिसप्रकार राजस्थान में सरकान ने इस कानून को रोक रखा है. मध्यप्रदेश सरकार को भी रोकना चाहिए अन्यथा मिठाई, नमकीन, किराना दुकानदारों को व्यापार करना दुभर हो जाएगा. क्योंकि कानून इतना कड़ा है कि इसके पालन में जरा भी चूक हुई तो एक से पांच लाख तक के दंड के साथ सजा का भी प्रावधान है. इस कड़े कानून को रोकने के लिए प्रदेशभर  के व्यापारियों की बैठक का दौर चल रहा है. फिलहाल इन्दौर के 16 व्यापारिक संगठन एकजुट हुए है. जो  इस मुद्दे को लेकर इन्दौर के संजय सेतू पर  27 मार्च को सुबह 9 बजे धरना आंदोलन कर अपना विरोध जताएंगे. विरोध बैठक कर सरकार से अपील करेगे कि इस अव्यवहारिक कानून का परिपालन रोकें.

कौन है नए कानून के दायरे में
इस नए कानून के दायरे में खान-पान की चीजे बनाने व बेचने वाले आ रहे हैं. इन व्यापारियों को  लायसेंस बनवाना पड़ेगा. इसमें केटरीन और कंफेक्शनरी व बैकरी वाले भी है तो दालमिल, आयलमिल व घी निर्माता भी है.

भ्रष्टाचार बढ़ेगा

व्यापारियों का कहना है कि मान लीजिए कि कोई दुकानदार पर कार्र्रवाई होती है और उस पर सजा या पांच लाख का दंड आरोपित किया जाता है. तो अपने बचाव के लिए रिश्वत देने का प्रयास करेंगा. इस तरह इस नए कानून से भ्रष्टïाचार को बढ़ावा मिलेगा. लिहाजा सरकार को लायसेंस प्रक्रिया को सरल कर लागू करना चाहिए. क्योंकि इसमें जो जानकारी मांग जा रही है वह देना संभव नहीं है.

लागू करने के बाद कैसा संशोधन

सरकार ने इस कानून को 5 अगस्त 2011 से लागू कर दिया है और इसमें 5 अगस्त 2012 तक ढिलाई बरतने के लिए अधिकारियों को निर्देश भी दिए है. इसी के साथ देशभर में सर्र्कुलर जारी कर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लिए व्यापारियों से 31 मार्च कर इसके लिए संशोधन प्रस्ताव या सुझाव भी मांगा है. ये दोहरी नीति भी व्यापारी समझ नहीं पा रहे हैं.

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