कृषि विकास दर 18 प्रतिशत

भोपाल,29 जून, आर्थिक विकास में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि अर्जित करते हुए मध्यप्रदेश ने वर्ष 2011-12 में 12 प्रतिशत आर्थिक विकास दर हासिल की है. यह तथ्य वर्ष 2011-12 के संशोधित आकलन से सामने आया है.

पशुपालन सहित कृषि और निर्माण क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग कार्य करते हैं. इन क्षेत्रों में विकास दर बढऩे से प्रदेश की बड़ी आबादी को फायदा होगा. अतिरिक्त आय से उनके स्वास्थ्य, शिक्षा एवं अन्य क्षेत्रों में अधिक खर्च करने से राज्य में और अधिक पूंजी निवेश तथा उत्पादन का मार्ग प्रशस्त होगा. कृषि प्रधान अर्थ-व्यवस्था वाले मध्यप्रदेश ने कृषि के क्षेत्र में भी नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए वर्ष 2011-12 में लगभग 18 प्रतिशत कृषि विकास दर हासिल करने का गौरव हासिल किया है. यह मध्यप्रदेश सरकार द्वारा कृषि को लाभकारी बनाने के लिए किये गये लगातार कटिबद्ध प्रयासों का सुफल है.

इसके अलावा, इस दौरान प्रदेश में निर्माण क्षेत्र में लगभग 17 प्रतिशत और 8 प्रतिशत औद्योगिक विकास दर हासिल की गयी. मध्यप्रदेश में सकल घरेलू उत्पाद में औद्योगिक क्षेत्र का योगदान बढ़ रहा है. वर्तमान में यह 29 प्रतिशत है. इससे प्रदेश के विकास के नये द्वार खुले हैं. साथ ही रोजगार बढ़ाने और अधिक पूँजी निवेश की संभावनाएँ बढ़ी हैं.

कृषि-महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ- विगत 8 वर्षों में समग्र फसलों का उत्पादन 142 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 254 लाख मीट्रिक टन. फसल उत्पादकता 831 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 1223 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर. वर्ष 2011-12 में गेहूँ का 127 लाख मीट्रिक टन रिकार्ड उत्पादन. इसके विपरीत वर्ष 2004-05 से पूर्व मध्यप्रदेश में पाँच वर्ष में दो बार ऋणात्मक विकास दर दर्ज की गयी. वर्ष 2000-01 में विकास दर -7 प्रतिशत तथा वर्ष 2002-03 में -4 प्रतिशत थी. वर्ष 2004-05 में मध्यप्रदेश की विकास दर महज 3 प्रतिशत थी. मध्यप्रदेश ने यह उपलब्धियाँ अनेक विपरीत परिस्थितियों में हासिल की है. पिछले सात वर्षों में दो वर्षों को छोड़कर वर्षा सामान्य से काफी कम रही. वर्ष 2009 में औसत से 35 प्रतिशत तथा वर्ष 2010 में 26 प्रतिशत कम वर्षा हुई.

साथ ही वर्ष 2010-11 में पाले के प्रकोप से कृषि उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ा. इसके बावजूद, वर्ष 2009-10 में लगभग 10 प्रतिशत तथा वर्ष 2010-11 में लगभग 8 प्रतिशत विकास दर आँकी गयी. वर्ष 2004-05 के बाद प्रदेश की विकास दर लगभग पाँच प्रतिशत से कम किसी भी वर्ष में दर्ज नहीं हुई.

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