नागपुर, 20 नवंबर. हिन्दी के प्रसार-प्रचार में नवभारत के संस्थापक श्री रामगोपाल माहेश्वरी एवं बृजलाल बियाणी का अविस्मरणीय योगदान रहा है. श्री रामगोपाल माहेश्वरी इस अभियान के भीष्म पितामह हैं तो श्री विनोद माहेश्वरी निरंतर उनके कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं. इससे समस्त हिन्दी प्रमियों को खुशी होती है.

यह बात केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मुकुल वासनिक ने विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के वार्षिक अधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि कही.  सम्मेलन में वासनिक के हाथों डा. घनश्याम मूंदड़ा को स्वास्थ्य व सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हेतु प्रेरणापुंज सम्मान से नवाजा गया. हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु डा. दामोदर खड़से को श्री रामगोपाल माहेश्वरी स्मृति साहित्य पुरस्कार एवं वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश दुबे को श्री रामगोपाल माहेश्वरी स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवसर पर विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमंत्री श्री विनोद माहेश्वरी, कार्यकारी प्रधानमंत्री मधुप पांडेय, अध्यक्ष सुरेश शर्मा, उपाध्यक्ष उमेश चौबे, डा. करुणा उमरे, संयुक्त मंत्री महेश टावरी, साहित्य मंत्री परमात्मानंद पांडेय, सदस्य रविशंकर दीक्षित, अनंतराय रावल, रमेशप्रसाद शुक्ला, डा. सागर खादीवाला, कुंजबिहारी अग्रवाल उपस्थित थे.

अहिंसा ही बात मनवाने का शक्तिशाली माध्यम
वासनिक ने कहा कि हिंदुस्तान की किसी भी चीज को नुकसान होने पर जिसके दिल पर चोट लगती है वही भारतीय कहलाने के लायक है. चाहे वह भाषा हो, देश की सम्पत्ति हो, साहित्य हो, लोकतंत्र हो या फिर संस्कृति या कला. मगर कुछ लोग संविधान के खिलाफ जाकर लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने साबित कर दिखाया था कि अहिंसा एक शक्तिशाली माध्यम बन सकता है. डा. बाबासाहब आंबेडकर ने आजादी के बाद यह कहा था कि आजादी के पूर्व देश का संविधान नहीं था मगर अब देश का संविधान है और किसी को भी अपनी बातें मनवाने के लिए असंवैधानिक तरीकों को अपनाने का अधिकार नहीं दिया जा सकता. उन्होंने सम्मेलन में सम्मानित किये गए सत्कारमूर्तियों का अभिनंदन करते हुए सम्मेलन द्वारा चलाए जा रहे विविध उपक्रमों की सराहना की.

Related Posts: