एक अंग्रेजी अखबार की खबर से पूरे देश में हड़कंप

बिक्रमसिंह की नियुक्ति को चुनौती

नई दिल्ली, 4 अप्रैल. सेना से जुड़े विवाद जैसे खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे. अब मौजूदा आर्मी चीफ जनरल वी के सिंह के बाद आर्मी की कमान संभालने वाले ले. जन. बिक्रम सिंह की नियुक्ति को चुनौती दे दी गई है. सिंह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक पीआईएल दायर कर उनकी नियुक्ति को चुनौती दी गई है. मिली जानकारी के मुताबिक पीआईएल (जनहित याचिका) सेना के कुछ पूर्व अधिकारियों, नौकरशाहों और पत्रकारों ने दायर की है.

याचिकाकर्ताओं में एडमिरल रामदास और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी भी शामिल हैं. 60 पन्नों की इस याचिका में लेफ्टिनेंट जनरल बिक्रम सिंह पर यह भी आरोप लगाए हैं कि 2001 में जम्मू में हुए फर्जी मुठभेड़ में उनकी भूमिका रही थी. याचिका में यह भी कहा गया है कि जनरल बिक्रम सिंह कांगो में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के तहत नियुक्त अपने अधीनस्थ ऑफिसरों को काबू में नहीं रख पाए थे. मौजूदा आर्मी चीफ जनरल वी के सिंह 31 मई को रिटायर हो रहे हैं. सरकार ने ले. जन. बिक्रम सिंह को नया आर्मी चीफ नियुक्त करने का ऐलान किया है.

एक्सरसाइज़ करती ही रहती है सेना

नई दिल्ली, 04 अप्रैल, नससे. सरकार और सेना ने सैनिक विद्रोह की आशंका को सिरे से खारिज कर दिया है. इस साल जनवरी माह में सेना की दो टुकडिय़ों के सरकार की जानकारी के बिना दिल्ली तक पहुंच जाने से जुड़ी बुधवार को दिल्ली से प्रकाशित एक अंग्रेज़ी दैनिक की रिपोर्ट को प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने बेबुनियाद बताते हुए इस रिपोर्ट पर ध्यान नहीं देने के लिए कहा है.

इससे पहले रक्षा मंत्रालय ने भी आज सुबह एक अंग्रेज़ी दैनिक में छपी इस रिपोर्ट को आधारहीन और गलत कहते हुए खारिज कर दिया था, और कहा था कि सेना ऐसी एक्सरसाइज़ समय-समय पर करती ही रहती है. रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सितांशु कार ने एक बयान में कहा, अखबार की रिपोर्ट में उठाए गए सवालों पर सेना ने स्थिति साफ कर दी है. सेना ऐसी एक्सरसाइज़ समय-समय पर करती है. इस बीच, इस रिपोर्ट को लेकर सियासी गलियारों में भी हलचल मच गई थी, और प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी ने इस पर प्रधानमंत्री से तुरंत जवाब देने को कहा था. उल्लेखनीय है कि बुधवार को दिल्ली से प्रकाशित एक अंग्रेज़ी दैनिक के मुताबिक इस साल जनवरी माह में जिस दिन सेनाप्रमुख जनरल वीके सिंह अपनी जन्मतिथि से जुड़े विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए थे, उसी दिन सेना की दो यूनिट सरकार की जानकारी के बिना दिल्ली तक पहुंच गई थीं, जिन्हें वहां से लौटाया गया था.

खंडन से भाजपा संतुष्ट

भाजपा के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार और सेना दोनों ने ही सेना के कूच के बारे में मीडिया में आई रिपोर्ट को गलत बताया है और इस पर विश्वास करना चाहिए. भाजपा को उम्मीद है कि  प्रधानमंत्री सेना जैसी महत्वपूर्ण संस्था के साथ संबंधों को और बेहतर बनाने के लिए सक्रिय भूमिका अदा करते रहेंगे.

हालाकि श्री प्रसाद ने रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख के बीच कथित विवाद को लेकर सामने आये अनेक मामलों की ओर इशारा करते हुए कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के कार्यकाल में सरकार और सेना के रिश्ते बहुत बढिय़ा नहीं रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार में शासन क्षमता और निर्णय लेने में तालमेल की कमी रही है जिससे देश को परेशानियों का सामना करना पड़ा है और यहां तक कि सेना को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ा. उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति देश हित में नहीं है और सरकार तथा सेना में संतुलन बनाये रखा जाना चाहिए. यह पूछे जाने पर कि सरकार ने जिस तरह से एक अंग्रेजी दैनिक में आयी इस खबर का खंडन कर दिया है उसके बारे में भाजपा का क्या रूख है उन्होंने कहा कि अगर इस खबर को पूर्णता में देखें तो यह गंभीर विषय है लेकिन सरकार ने इसका खंडन कर दिया है तो उसे स्वीकार कर लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि सेना और सरकार के रिश्तों के बारे में किसी तरह की आशंका नहीं होनी चाहिए और इस बारें में किसी भी प्रायोजित समाचार के लिए कोई गुंजाईश नहीं होनी चाहिए.

आखिर क्या छपा है अखबार में

एक अंग्रेजी अखबार ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि हिसार से 33 वीं आर्मर्ड डिवीजन की एक यूनिट दिल्ली आ रही सेना की टुकड़ी बहादुरगढ़ के इंडस्ट्रियल पार्क तक पहुंच गई थी, जबकि आगरा से 50 पैरा ब्रिगेड की टुकड़ी पालम पहुंच चुकी थी. लेकिन दोनों को वहीं रोककर वापस भेज दिया गया था. ये दोनों टुकडिय़ां बिना किसी इजाजत के दिल्ली के पास आ गई थीं. नियमों के मुताबिक राजधानी के आसपास सेना की हलचल के बारे में सरकार को पहले से ही जानकारी देनी होती है. बताया जा रहा है कि 33वीं आर्मर्ड डिवीजन की इस यूनिट में करीब 48 हथियारबंद गाडिय़ां शामिल थीं. जब इस बात की सूचना रक्षा मंत्रालय को मिली तो डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल एके चौधरी को तलब किया गया. लेफ्टिनेंट जनरल एके चौधरी से दोनों टुकडिय़ों को वापस भेजने को कहा गया था.

अखबार के मुताबिक लेफ्टिनेंट जनरल एके चौधरी ने रक्षा मंत्रालय से कहा था कि यह रूटीन अभ्यास है, जहां सेना कोहरे में मूवमेंट का अभ्यास कर रही थी. ऐसी खबर है कि जिस वक्त सेना का यह ‘मूवमेंटÓ हुआ, उस वक्त रक्षा सचिव एस.के. शर्मा मलेशिया दौरे पर थे लेकिन सरकार ने उन्हें तुरंत तलब किया. इसके बाद शर्मा रात में दिल्ली पहुंचे और सीधे अपने दफ्तर गए.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सेना की दो टुकडिय़ों के मूवमेंट की जानकारी 17 जनवरी की सुबह प्रधानमंत्री को पूरे मामले की जानकारी दी गई थी. उत्तर पश्चिम क्षेत्र में सेना की मूवमेंट के बारे में जानकारी ली गई और पाया गया कि कुछ भी असामान्य नहीं है. दो टुकडिय़ों के मूवमेंट की सेना के अतिरिक्त महानिदेशक (जन सूचना) मेजर जनरल एसएल नरसिंहन ने पुष्टि की है. लेकिन उन्होंने कहा है कि यह रूटीन एक्सरसाइज थी. रक्षा विशेषज्ञ कर्नल (रिटायर्ड) यूके राठौड़ मानते हैं कि यह दोनों टुकडिय़ां बहुत छोटी थीं, इसलिए पहले से जानकारी देने की जरूरत नहीं है. लेकिन रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा ने इस मामले को उम्र विवाद से जोडऩे को ग़लत बताया है. शर्मा ने एक निजी टीवी चैनल ने एक निजी टीवी चैनल से कहा है कि सेना की टुकडिय़ों का मूवमेंट गलत नहीं था.  गौरतलब है कि 16 जनवरी को ही थल सेनाध्यक्ष वीके सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. जून, 1984 में ऑपरेशन ब्लूस्टार के मद्देनजऱ सेना की सिख यूनिटों के कुछ सिख दिल्ली की तरफ बढ़े थे. इसी को देखते हुए राजधानी में सेना की टुकडिय़ों के मूवमेंट के लिए पहले से ही जानकारी देने का प्रोटोकॉल बनाया गया था.

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