औबेदुल्लागंज,1
जून,नभासं. पिछले हफते औबेदुल्लागंज नगर में जो भी हुआ वह नगर के लिए हितकारी नंही है.नगर के विकास में साफ-सफाई,पानी की व्यावस्था करना तो हुआ दूर और धरना ही धरना चलता रहा.

एक धरना हुआ सीएमऔ को हटाने के लिए तो  एक हुआ डीएस तोमर के साथ अभ्रद व्यावहार करने के संबध में विरोध का.नगर में चर्चा है की डीएस तोमर पिछले 5 माह से सुर्खियों में है.पूरी की पूरी राजनीती तोमर के आगे पिछे घूमती रही.धरने का मामला चल ही रहा था की एक नामांतरण के लिए गोलू उर्फ  उमाशंकर राजपूत के मामले ने नया मोड़ ले लिया.तहसीलदार की रिर्पोट पर जिस तरह का प्रकरण कायम किया है ऐसी धटना नही हुई,ऐसा बताया जा रहा है.धारायेें 452-294-506-34 में प्रकरण कायम कर भाजापा नेता बाला सेनी को भी जबरन फ ंसाया गया है.कहा सुनी,अभ्रद व्यावहार माने तो बाला सेनी कहा से आगाया.थाने में जब उमाशंकर राजपूत चक्कर खाकर गिरे तब बाला सेनी थाने पहुचे थे.श्रातव्य हो की 10 मई को बाला सेनी द्वारा औगंज थाने में तहसीलदार के खिलाफ  गाली-गलोच की रिर्पोट लिखबाई थी और इसकी शिकायत कलेक्टर रायसेन से की थी.

इसी का बदला लेने के लिए तोमर ने थाने में बाला सेनी का नाम जुड़बा दिया.नप को कोयले की कोठरी है जो भी इस पर बैठेगा दाग जरुर लगेगा चाहे मामला फिनाईल एंव पाउडर का हो,3-3 हजार के चैक काटने का,स्वागत गेट गिरने के बाद पैमेट का हो या कचरा र्टली,बजार बैठकी के 14 हजार के 9 हजार जमा का हो. नगर के पार्को का विकास इन सब से रुका हुआ है ऐसा लगता है की शेर भी कोयले की कोठरी का आनंद लेने में भॅंवर में फस गये थे.जब भॅंवर में 15 पार्षद अध्यक्ष है तो उनका भी ख्याल रखना चाहिए जैसे मलाई बाले 5-6 कर्मचारी ही रबड़ी उड़ा रहै हो.इसलिए जनप्रतिनिधी कैसे चुप रहै सकते है?

Related Posts: