लखनऊ. भाजपा के प्रदेश महासचिव विंध्यवासिनी कुमार ने कहा है कि प्रदेश सरकार के मुखिया द्वारा सबसे बड़े घोटाले में कुछ निर्दोषों के फंसे होने का बयान गंभीर सवाल खड़ा करता है. जिस मामले की लंबे समय से सीबीआई जांच कर रही है उसमें मुख्यमंत्री की टिप्पणी जांच को प्रभावित करने वाली है. सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इस टिप्पणी का आधार क्या है? कौन निर्दोष है, मुख्यमंत्री उसका नाम बताएं.

उल्लेखनीय है कि अखिलेश यादव ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में पांच हजार करोड़ से ज्यादा के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन घोटाले में कुछ निर्दोष भी फंस गए हैं. हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया. यह भी कहा, इस घोटाले के चलते प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की पूरे देश में बदनामी हुई है. मुख्यमंत्री यहां एक कार्यक्रम में बोल रहे थे. उल्लेखनीय है कि इसी घोटाले में वरिष्ठ आइएएस अधिकारी प्रदीप शुक्ला सहित तमाम अधिकारियों को राहत देते हुए प्रदेश सरकार ने उनके खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति नहीं दी है. एनआरएचएम घोटाले की जांच में किसी अंजाम तक न पहुंचने के लिए सीबीआइ की भी मुख्यमंत्री ने खिंचाई की. उन्होंने कहा, सब कुछ उपलब्ध होने और सारे तकनीकी संसाधनों से लैस सीबीआइ भी घोटाला छिपाने के लिए हुईं हत्याओं की वजह नहीं जान पाई. वहीं चिकित्सा, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री अहमद हसन ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग माफिया व बेइमानों की टोली की गिरफ्त में है, जो लगातार साजिश कर रहे हैं लेकिन वह उनके मंसूबों को कामयाब नहीं होने देंगे. महकमे में अच्छे अधिकारी भी काम कर रहे हैं लेकिन बेइमानों की तादाद काफी बड़ी है, जिसे वह ठिकाने लगाकर रहेंगे. बसपा सरकार के कार्यकाल में विभाग में जिस तरह का भ्रष्टाचार और लूटपाट हुई है. उसको पूरी तरह बेपर्दा किया जाएगा.

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