राखी की माँ के ब्याह ने रखी कन्यादान योजना की नींव

भोपाल, 24 अप्रैल, नभासं. मंडीदीप निवासी बसंती को सहज, विश्वास नहीं हो पा रहा है कि जिसने धर्म पिता बनकर 21 वर्ष पहले उसका कन्यादान किया था वही आज उसकी बिटिया राखी की शादी में भी शामिल होकर बारात की अगवानी करेंगे.

उस अविस्मरणीय शादी ने बाद में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की नींव रखी. इक्कीस वर्ष पहले शिवराजसिंह चौहान ने बुदनी क्षेत्र से पहली बार विधायक रहते हुए 17 फरवरी 1991 को जिस बेटी का अपने खर्चे पर विवाह किया था उसकी पहली बेटी राखी की शादी 25 अप्रैल को भोपाल में होने जा रही है. रिश्ते में मुंह बोली इस नातिन के ब्याह में शामिल होने वाले आज मध्यप्रदेश के  मुख्यमंत्री हैं.

आज पूरे मध्यप्रदेश के गांव-गांव और शहर-शहर में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की चर्चा है. इस योजना में प्रदेश के प्राय: सभी जिलों में सामूहिक विवाह समारोहों की धूम है. सरकार इन आयोजनों को करवाती है. विधानसभा अध्यक्ष, मंत्री और विधायक से लेकर कलेक्टर तथा अन्य अधिकारी तक बारातों की अगवानी करते हैं. गरीब की बेटी की शादी भी इतनी धूमधाम से होती है यह मध्यप्रदेश में ही देखा जा सकता है. इस योजना में अब तक एक लाख 83 हजार बेटियों के हाथ पीले किये गये हैं. ऐसी ही योजनाओं ने प्रदेश में बेटी को बोझ से वरदान बनाया है. बहुत से लोगों को याद है 21 वर्ष पहले की वह घटना. स्थानीय लोग बताते हैं कि श्री शिवराज सिंह गाँवों में पैदल यात्रा कर ग्रामीणों से सीधे मिलते थे. वे इसी कारण पांव-पांव वाले भैया के नाम से ख्यात होते जा रहे थे.

ऐसे ही एक दिन श्री चौहान बुदनी क्षेत्र के गोन्दलवाड़ा, बम्होरी, नोनमेटा ग्रामों में घूमते हुए ग्राम बोरना पहुँचे. यहाँ इसी क्षेत्र के निवासी Ÿ मदन गुरू ने एक ऐसी समस्या का जिक्र किया कि श्री चौहान का मन द्रवित हो गया. श्री गुरू ने बताया कि ग्राम बोरना के बंजारा गुलाबसिंह की भतीजी बसंती विवाह योग्य हो गयी है. इस लड़की के पिता, जो गुलाबसिंह के बड़े भाई थे, गुजर गये हैं. उसकी माँ का पहले ही निधन हो चुका है. गुलाबसिंह की खुद तीन बेटियाँ हैं. तंगहाल है परिवार की हालत. ऐसे में बड़े भाई की बेटी की शादी करने की स्थिति में वह नहीं है. बसंती की हालत अनाथ जैसी ही थी. शिवराजसिंह चौहान ने बसंती को न केवल अपनी धर्मपुत्री बनाया और मंडीदीप निवासी इन्दलसिंह के साथ उसका धूमधाम से विवाह रचाया. शादी की न केवल खुद पूरी तैयारियां की बल्कि शादी की तिथि 17 फरवरी 1991 से पहले वे जहाँ भी अपनी यात्रा में गये अपनी बेटी के विवाह का निमंत्रण भी देते गये.

देखने लायक थी वह शादी. शिवराज खुद फूलों की पंखुडिय़ों और पुष्पों के हार से द्वार पर खड़े होकर बारात का स्वागत कर रहे थे. उन्होंने कन्यादान किया और बेटी बसंती को बड़े ही भावुक क्षणों में उसकी ससुराल मंडीदीप विदा किया. श्री चौहान ने तभी महसूूस किया कि गरीब परिवार के लिये बेटी का ब्याह कितनी बड़ी समस्या है. उसी वर्ष श्री चौहान 1991 में विदिशा संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गये. सांसद बनने के बाद श्री चौहान नियमित रूप से अपने सामर्थ्य के अनुसार प्रतिवर्ष बेटियों के विवाह करवाने लगे. बेटियों के भाग्य से श्री चौहान 29 नवम्बर 2005 को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने. उन्होंने वर्ष 2006-07 से पूरे प्रदेश की सबसे लोकप्रिय योजनाओं में से एक मुख्यमंत्री कन्यादान योजना शुरू की. योजना के प्रारंभिक तीन वर्ष में बेटी की शादी में शासन की तरफ से पाँच हजार रुपये व्यय किये जाते थे. बाद में यह राशि बढ़ाकर 7500 रूपये तथा पुन: बढ़ाकर दस हजार रुपये की गयी. अभी एक माह पहले मुख्यमंत्री ने योजना की राशि बढ़ाकर प्रति विवाह 15 हजार कर दी. यह राशि इतनी है कि खूब आराम से सामूहिक विवाह के आयोजन हो जाते हैं और बेटी को गृहस्थी का पर्याप्त सामान भी मिल जाता है. देखा गया है कि स्थानीय लोगों और जन-प्रतिनिधियों की रुचि जुड़ जाने से बेटियों को फ्रिज, टी.वी., बिस्तर, पलंग, संदूक, साड़ी आदि अनेक वस्त्रों के साथ सोने-चांदी के जेवर भी मिल रहे हैं. एक अनुमान के अनुसार इस योजना में अब तक 133 करोड़ रुपये व्यय हो चुके हैं. इसी बीच 3 मार्च 1993 को बसंती और इन्दल सिंह के घर राखी का जन्म हुआ. शिवराजसिंह चौहान नाना बन गये. इसी नातिन की शादी 25 अप्रैल को भोपाल में लाल परेड ग्राउंड के पास जहाँगीराबाद स्थित लाला शादी घर में होने जा रही है. इन्दल और बसंती ने अपनी 19 वर्षीय बेटी की शादी इब्राहिमपुरा निवासी सोनू के साथ तय की है.

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