भाजपाई दिग्गजों समेत उद्धव-राज, आठवले, जया, चौटाला शामिल, नहीं पहुंच पाए शिवराज

Modiअहमदाबाद, 26 दिसंबर. 16 मंत्रियों के साथ नरेंद्र मोदी ने चौथी बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली। उनके शपथ ग्रहण में मौजूद नेताओं की लिस्ट पर नजर डालने के बाद ऐसा लग रहा था जैसे कि यह 2014 के एनडीए की तस्वीर हो।

लालकृष्ण आडवाणी समेत बीजेपी के सभी दिग्गज नेता, पार्टी शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री के अलावा पंजाब के सीएम प्रकाश सिंह बादल तो मौजूद थे ही, आईएनएलडी के सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाल, तमिलनाडु की मुख्यमंत्री और एआईएडीएमके की नेता जे. जयललिता और एमएनएस नेता राज ठाकरे ने भी पहुंचकर भविष्य की राजनीति के संकेत दे दिए। सबसे चौंकाने वाली रही शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे, आरपीआई नेता रामदास अठावले और एमएनएस के मुखिया राज ठाकरे की एक साथ मौजूदगी। बुलाए गए लोगों में उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक नहीं पहुंचे, पर राजनीतिक पंडितों का कहना है कि वह मोदी के विरोध में नहीं हैं। उन्होंने गुजरात की जीत के बाद मोदी को सबसे पहले बधाई दी थी।

जानकारों का कहना है कि वह मोदी के साथ खड़ा होते दिखने से पहले हर विकल्प के नफा-नुकसान पर गौर कर लेना चाहते हैं।  मोदी की चौथी पारी के शपथ ग्रहण समारोह में जिन-जिन पार्टियों के नेता शामिल हुए उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि इन पार्टियों की मोदी के 2014 में प्रधानमंत्री के प्रत्याशी के रूप में सहमति है। समारोह में पार्टी की तरफ से लालकृष्ण आडवाणी, नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज, राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली, बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह और वैंकेया नायडू समेत सभी बड़े नेता शामिल हुए। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमण सिंह के अहमदाबाद पहुंचने को इससे जोड़ कर देखा जा रहा है कि इन दोनों को मोदी के नेतृत्व से कोई समस्या नहीं है। इन दोनों के अलावा गोवा के सीएम मनोहर पार्रिकर, कर्नाटक के मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार और झारखंड के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए।

नीतीश नदारद
जैसा कि अपेक्षित था, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार या जेडी (यू) का कोई भी नेता नहीं पहुंचा। इससे यह एक बार फिर साफ हो गया है कि एनडीए की ओर से मोदी को प्रधानमंत्री के संभावित उम्मीदवार के रूप में प्रॉजेक्ट करने को लेकर नीतीश के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। सरदार पटेल मैदान में मोदी का शपथ ग्रहण समारोह 2014 की सियासत का महामंच दिखा। जेडी(यू) को छोड़कर पूरा एनडीए वहां मौजूद था। नीतीश के बारे में कहा जा रहा है कि उनकी प्रतिक्रिया और रुख को जानते हुए मोदी ने उन्हें शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का आमंत्रण ही नहीं भेजा था।

Related Posts: