जलगांव, 6 नवंबर. जनता महंगाई से बेहाल है लेकिन कोई उसकी सुध लेने को तैयार नहीं है।

राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी ने भी रविवार को महंगाई के मुद्दे पर केंद्र सरकार के सुर में सुर मिलाया। पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी पर एनसीपी ने सरकार का समर्थन किया है। पवार ने कहा कि तृणमूल के समर्थन वापस लिए जाने की धमकी के बाद भी एनसीपी सरकार के साथ है। ईंधन कीमतों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने पर पवार ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का पक्ष लिया है।  प्रधानमंत्री ने जो कहा वह सही था। प्रधानमंत्री  ने शुक्रवार को एक तरह से पेट्रोल कीमतों में वृद्धि को उचित ठहराते हुए कहा था कि इस मामले में बाजार को अपने हिसाब से चलने देना चाहिए।

प्रधानमंत्री के कहने का मतलब यह है कि ईंधन की कीमतें बाजार ही तय करेगा। इस पर सरकार कुछ नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा कि यह (मूल्य नियंत्रण) वह सामान्य दिशा है जिस पर हमें आगे बढऩा है। मुझे लगता है कि कीमतों को नियंत्रणमुक्त किए जाने का कदम इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। बृहस्पतिवार को खाद्य उत्पादों की महंगाई दर नौ महीने के उच्चतम स्तर 12.21 फीसदी पर पहुंच गई है। इसके बाद तेल कंपनियों ने पेट्रोल की कीमतों में 1.80 रुपये प्रति लीटर का इजाफा कर महंगाई में तड़का लगा दिया। मालूम हो कि यूपीए 2 के शासनकाल में अब तक पेट्रोल की कीमतों में 29 रुपए प्रति लीटर का इजाफा हो चुका है।

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