नई दिल्ली, 26 दिसंबर. यूपी विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं. राजग के बैनर तले साथ मिलकर चुनाव लडऩे वाली भाजपा-जद यू गठबंधन में दरार के संकेत हैं. यूपी चुनावों के लिए सीट बंटवारे को लेकर दोनों पार्टियों के बीच बातचीत नाकाम रही है.

जद यू उत्तरप्रदेश चुनाव के लिए कम से कम तीन दर्जन सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करना चाहती थी. लेकिन भाजपा इसपर राजी नहीं हुई. अब जदयू ने अपनी मांगें नहीं माने जाने के विरोध में यूपी चुनाव में एक भी उम्मीदवार खड़ा नहीं करने का फैसला किया है. जदयू आलाकमान ने कहा है कि पार्टी कार्यकर्ता निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लडऩे के लिए स्वतंत्र हैं. वहीं भाजपा ने कहा है कि वह पंजाब छोड़कर अन्य राज्यों में अकेले ही चुनाव लड़ेगी. पंजाब में बीजेपी का अकाली दल के साथ गठबंधन है. भाजपा नेता वेंकैया नायडू ने कहा कि हम अपने बूते चुनाव लड़ेंगे. पंजाब छोड़कर हमारा कहीं भी किसी पार्टी से गठबंधन नहीं होगा. जद यू के अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जद यू या तो चुनाव का वहिष्कार करेगी या वह पार्टी के प्रदेश इकाई के निर्णय के अनुसार आगे की रणनीति तय करेगी.

सूत्रो के मुताबिक भाजपा-जद यू में सीटो के बंटवारे को लेकर कई दौर की बातचीत हुई लेकिन सीटों के तालमेल पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई. सूत्रो के मुताबिक भाजपाई रणनीतिकार उसे दो दर्जन से अधिक सीट देने पर राजी नहीं थी जबकि जद यू तीन दर्जन सीट मांग रही थी. सूत्रों के मुताबिक इस टूट के पीछे पार्टी में एकराय का अभाव भी बताया जा रहा है. दरअसल भाजपा का एक वर्ग लोकसभा चुनावों के मद्देनजर जद यू के साथ तालमेल बनाये रखना चाहता है जबकि दूसरा वर्ग जद यू का राज्य में प्रभाव नहीं होने की दलील देते हुये तालमेल के पक्ष में नहीं है. इस वर्ग की दलील है कि पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा ने जद यू और अपना दल को जितनी सीटें दी वे भाजपा के प्रभाव वाली सीटें थी. लेकिन इन सीटों पर जद यू और अपना दल को करारी हार का सामना करना पड़ा और उनके उम्मीदवारों की जमानतें जब्त हो गई थीं. वहीं जद यू के रणनीतिकारों का कहना है कि पूर्वांचल में पार्टी बेहतर प्रदर्शन करेगी. पार्टी को विश्वास है कि वह नीतीश फैक्टर से उसे फायदा होगा. हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि अंतिम समय में नीतीश के हस्तक्षेप के बाद कोई रास्ता निकल सकता है.

Related Posts: