रवीन्द्र भवन में आयोजित हुआ भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठï पर विमर्श

भोपाल, 4 सितंबर. भाजपा के वरिष्ठï नेता और पूर्व केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री डा. मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि औपनिवेशिक शासन में शिक्षा का ह्रïस हुआ था.
विदेशी मानसिकता शिक्षा क्षेत्र में हावी की गई जिससे व्यक्ति समाज से कट गया, देश का समृद्घ अतीत भूल गये. आज शिक्षा को समग्रता दिये जाने की आवश्यकता है जो व्यक्ति को समाज से जोड़े और व्यक्ति समाज के विकास के लिए समर्पित हो. समाज के विकास के लिए व्यक्ति को उपयोगी बनाने के आयाम खोजे जाने की आवश्यकता है शिक्षा को बाजारोन्मुखी बनाने के बजाए समाजोन्मुख बनाने की आवश्यकता है. शिक्षा जॉब क्रियेटिव होने के बजाय आज जॉब ओरिएन्टेड बनकर रह गई है. इसी का नतीज है कि वैश्विक समाज थका हारा बनकर रह गया है. पश्चिमी दुनिया में आई मंदी ने लाखों लोगों के हाथ से काम छीन लिया है.

डा. जोशी ने रविंद्र भवन में भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठï द्वारा आयोजित विमर्श का उद्ïघाटन करते हुए कहा कि शिक्षा गुणवत्ता और उद्ïदेश्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए. विशाल शिक्षा की भवन बनाने की बजाय हमें मानव संसाधन के विकास की दिशा में प्रयास केन्द्रित करना चाहिए. शिक्षा विमर्श उद्ïघाटन सत्र की अध्यक्षता मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद प्रभात झा समारोह में विशिष्टï अतिथि थे. पूर्व में डा. मुरली मनोहर जोशी, मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा, वरिष्ठï मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा, अर्चना चिटनीस, शीर्ष शिक्षाविद जे.एस. राजपूत, प्रो. संतोष कुमार ने दीप प्रज्जवलित किया और माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पमाला अर्पित की. शिक्षा प्रकोष्ठï के प्रदेश संयोजक डा. सुधीर शर्मा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में संभावनाएं और चुनौतियों पर प्रकाश डाला.
डा. जोशी ने देश में शिक्षा की चिंताजनक स्थिति पर दु:ख व्यक्त करते हुए कहा कि इस दिशा में ठोस प्रयास करने की आवश्यकता है. देश में शिक्षा की केन्द्रों में गुणवत्ता और मानव मूल्यों को इस तरह पिरोया जाये कि दुनिया के उन्नत देश अपने शीर्ष शिक्षा केन्द्रों को भारत का नालंदा बताने का गर्व कर सके. भारत के अतीत में शिक्षा का आलोक जगत प्रसिद्घ रहा है. दुनिया में जहाँ विज्ञान के विकास का इतिहास 70 से 100 वर्ष पुराना है भारत में ज्ञान-विज्ञान, आयुर्वेद की अनेक विद्याएं हजारों वर्ष पूर्व विकसित हो चुकी थी.

शिक्षा विमर्श के प्रमुख वक्ता प्रो. शिक्षाविद जगमोहन सिंह राजपूत ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता के बगैर शिक्षा का विस्तार वर्तमान पीढ़ी का भविष्य की पीढ़ी के साथ अन्याय है. इसे रोकने के लिए हमें आगे आना चाहिए उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षा का केन्द्र शाला महाविद्यालय और विश्वविद्यालय अपनी पूर्णत: और समग्रता को लिये हुए ही शिक्षा का विस्तार कर सकता है.

शिक्षा विमर्श के अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनीस ने कहा कि शिक्षा के विस्तार में राइट टू एज्यूकेशन एक्ट लागू हो चुका है, लेकिन इतना ही पर्याप्त नहीं है. वर्तमान पीढ़ी को राइट एज्युकेशन (सही शिक्षा) मिलना चाहिए. शिक्षा समाज से विलग करने के बजाए समाज और शिक्षा के बीच में जीवंतता लाने में सक्षम बनाई जाना चहिए. प्रदेश में शिक्षक को राष्टï्र के प्रति समर्पित बनाने के लिए संसाधन जुटाए गये हैं. 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक कर्तव्य पर्व मनाया जाएगा. उच्च शिक्षामंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने विमर्श के अवसर पर शिक्षाविदों, गुरुजनों और शिक्षा प्रेमियों का स्वागत करते हुए कहा कि 5 सितंबर शिक्षा दिवस की पूर्व संध्या पर संपन्न होने जा रहा जो शिक्षा विमर्श प्रदेश सरकार के सौद्ïदेश्य चिंतन का प्रमाण है.

विमर्श से जो भी निष्कर्ष जो भी सामने आयेंगे उन्हें अमल में लाने और नीतियों का संवर्धन करने में उपयोग किया जायेगा. शिक्षा प्रकोष्ठï के संयोजक डा. सुधीर शर्मा ने शिक्षा को औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त कराये जाने की आवश्यकता रेखांकित की. उन्होंने कहा कि शिक्षा को ब्राउन की परिभाषा से मुक्त किया जाए. शिक्षा मानव विकास में रुकावट डालने की चीज नहीं है. शिक्षा प्रगति पथ पर आगे बढऩे के लिये स्वतंत्र चिंतन का एक आयाम है. डा. सुधीर शर्मा ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किये और स्वागत भाषण दिया. कार्यक्रम में प्रदेश संगठन महामंत्री अरविंद मेनन पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी, सांसद, वरिष्ठï मंत्री, शिक्षाविद्ï एवं गणमान्य जन उपस्थित थे.

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