एक रिसर्च बताती है कि सोशल मीडिया का एडिक्शन सिगरेट और अल्कोहल से भी ज्यादा एडिक्टिव है. तभी तो सोशल प्रोफाइल चेक करने के लिए वे नींद और सेक्स तक से समझौता कर लेते हैं सोशल नेटवर्किंग साइट्स की शुरुआत भले ही दूर बैठे लोगों को नेट पर मिलाने व बात करने का मौका देने के लिए हुई थी, लेकिन अब सीन थोड़ा बदल गया है. दरअसल, एक-दूसरे का हाल-चाल जानने के लिए ईजाद किया गया यह प्लैटफॉर्म नूट यूजर्स के लिए एक एडिक्शन बन चुका है.

कनेक्टेड रहने की लत

कमला नेहरू कॉलेज की स्टूडेंट सुवि मलिक एक्सेप्ट करती हैं कि वह एफबी एडिक्ट है। वह कहती हैं , च् अगर मैं सोते समय एफबी से लॉग आउट करती हूं , तो बेड पर जाने के बाद भी मोबाइल से एफबी पर नोटिफिकेशंस देखती रहती हूं। अगर ये ज्यादा देर तक पेंडिंग रह जाएं , तो मुझे बेचैनी होने लगती है.  इस बारे में सोशियोलॉजिस्ट हिना शाह का कहना है कि इंट्रोवर्ट नेचर वाले लोगों में यह एडिक्शन ज्यादा देखने को मिलता है। दरअसल , रीयल लाइफ में वे ज्यादा सोशल नहीं हा पाने की वजह से वे वर्चुअल वर्ल्ड में अपनी प्रजेंस दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ते। ऐसे नेचर वाले लोगों के लिए अजनबियों से दोस्ती करना कोई बड़ी बात नहीं होती.

कॉन्शस रहते हैं

बेशक एफबी व ट्विटर पर लोग खूब चिपके रहते हैं , लेकिन अपने काम की कीमत पर नहीं। तभी तो कुछ एग्जाम्स से पहले के हफ्तों में च् फेसबुक फास्ट  रखते हैं। यानी तब वे इस पर बिल्कुल लॉग – इन नहीं करते. यही वजह है कि सुवि इनके लिए क्रेज को अल्कोहल की तरह का एडिक्शन मानने से इनकार करती हैं. उनका कहना है कि अल्कोहल लेने के बाद आप अलग तरह बिहेव करते हैं , जबकि ट्विटर अकाउंट डिलीट होने पर आपकी ओर से ऐसा रिएक्शन नहीं आता.

सोशलाइजिंग का नशा

अगर हाल ही में आई एक रिसर्च की मानें, तो इसकी खातिर लोग अपनी नींद व सेक्स लाइफ तक की परवाह नहीं करते। सायकायट्रिस्ट्स की मानें, तो सोशल मीडिया का कॉन्सेप्ट इंटरेक्शन को एक नए लेवल पर ले जाता है। वैसे, इस एडिक्शन की एक खास वजह यह है कि इस प्लेटफॉर्म में हमेशा कुछ न कुछ चलता रहता है. ऐसे में दूसरों के बारे में जानने व अपने अपडेट्स से उनको इंप्रेस करने की चाहत इस एडिक्शन की एक वजह है, तो यहां मिलने वाले कॉम्प्लिमेंट्स एक अलग ही कॉन्फिडेंस देते हैं.

जरूरत है यह

वैसे, नेट यूजर्स यह मानते हैं कि वे इन साइट्स पर देर तक लॉग-इन रहते हैं, लेकिन इसे वे एडिक्शन नहीं मानते। मीडिया प्रफेशनल बृजमोहन दुग्गल की मानें, तो ऑफिस शेड्यूल की वजह से लोगों को बाहर जाकर फ्रेंड्स से मिलने-जुलने का वक्त नहीं मिल पाता। ऐसे में इन साइट्स पर दोस्तों के अपडेट से पता चल जाता है कि उनकी लाइफ में नया क्या चल रहा है। वैसे भी, इन दिनों पॉलिटिशियंस ट्विटर पर ही अपनी अपडेट देते हैं। इसलिए यह उनके प्रफेशन की भी जरूरत है। वहीं , डीयू स्टूडेंट प्रतीक खुराना कि अपने म्यूजिक बैंड के लिए उन्होंने फेसबुक पेज क्रिएट किया हुआ है। ऐसे में अगर वह डेली वॉल अपडेट नहीं करेंगे और क्वेरीज के जवाब नहीं देंगे , तो यह अनप्रफेशनल लगेगा।

क्या करें

अगर आपको भी एफबी पर लगातार घंटों गुजारने की आदत है , तो बेहतर होगा कि सेल्फ डिसिप्लिन के लिए कुछ बातों को फॉलो करें। जानें इस बारे में एक्सपर्ट्स के टिप्स-

<     ऑनलाइन टाइम को मॉनिटर करने के लिए स्टॉपवाच यूज करें या फिर कोई लिमिट सेट करें. इसके पूरा होने पर हर हाल में लॉग आउट कर दें.

<     फ्रेंड्स से टच में रहने के लिए फोन कॉल करें. उनका डायरेक्ट इंटरेक्शन बेशक आपको फेसबुक मेसेज से बेहतर महसूस कराएंगे.

<     कई सोशल साइट्स पर अपनी प्रजेंस दिखाने की होड़ में न रहें। किसी एक ही नेटवर्क की मेंबरशिप लें। इससे आपका समय बचेगा.

<     फेसबुक और ट्विटर को अपने काम के लिए टूल की तरह से यूज करें , न कि हर किसी के टच में रहने के या हर किसी को फॉलो करने के लिए.

<     अपनी प्रोफाइल अपडेट करने या पिक्चर्स चेंज करने में समय खराब न करें.

<     जब तक आपकी प्रफेशनल जरूरत न हो , तब तक फेसबुक या ट्विटर को फोन पर न रखें.

Related Posts: