कान [फ्रांस], 4 नवंबर. यूरो क्षेत्र के सरकारी ऋण संकट से निपटने के अभियान के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि उच्च आर्थिक वृद्धि बनाए रखने के लिए भारत की वित्तीय प्राथमिकताओं में कोई बदलाव नहीं होगा।

मनमोहन ने यहां जी-20 शिखर सम्मेलन को संबोधित करते की हुए गुरुवार को कहा कि वैश्विक संकट से पहले से ही अन्य बातों के अलावा वित्तीय समावेशी कार्यक्रम, आधारभूत परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक संसाधन जुटाने, मौद्रिक नीति के अनुरूप बदलाव के लिए बॉंड बाजार का विकास भारत की प्राथमिकताएं हैं। मनमोहन ने कहा कि इस दौरान वैश्विक और भारतीय वित्तीय बाजार में ऐसा कुछ नहीं हुआ जिससे उसकी प्राथमिकताओं में बदलाव किया जाए।

हम यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में जो भी नियमन संबंधी सुधार लाया जाता है उससे यह प्रक्रिया प्रभावित नहीं होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की प्राथमिकताएं अलग है। भारत में बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए पूंजी की जरुरत है लेकिन यह बड़ा जोखिम उठाने के लिए नहीं, बल्कि उच्च आर्थिक वृद्धि हासिल करने के वास्ते ऋण वृद्धि की गति बढाने के लिए जरुरी है। मनमोहन ने कहा कि भारत में जनता ही सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शेयरधारक है और वही करदाता है ऐसे में देश में बैंकों पर एक और कर लगाने से पूंजी की लगत बढऩे के अलावा इसका क्या औचित्य हो कसता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में मनमोहन ने कहा कि हमारी आर्थिक वृद्धि दर 7.6 से लेकर आठ प्रतिशत के बीच रहेगी, हम वापस उच्च आर्थिक वृद्धि की तरफ बढऩे के लिए कदम उठा रहे हैं। हमें उम्मीद है कि 2012-13 तक हम फिर से उच्च आर्थिक वृद्धि की राह पर होंगे। साथ ही मुद्रास्फीति में भी नरमी का रुख होगा। मध्यम काल में भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश विशेषकर आधारभूत क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर जोर रहेगा। इसके अलावा राजस्व वसूली में सुधार लाकर राजकोषीय घाटे को कम करने पर भी गौर किया जाएगा। कर सुधारों से राजस्व वसूली बढऩे की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री ने एक बार फिर आगाह किया कि यूरोपीय क्षेत्र में लंबे समय तक अनिश्चितता और अस्थिरता बने रहने से दूसरे देशों पर भी असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष [आईएमएफ] ऐसे में मदद कर सकता है। मनमोहन ने कहा कि यूरोप के सुनियोजित विकास और समृद्धि से यूरोपीय देशों के साथ-साथ दुनिया के दूसरे देशों का भी हित जुड़ा है।

आईएमएफ को और धन देंगे
भारत और अमेरिका सहित दुनिया की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के समूह जी-20 के नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) को और धन दिए जाने पर विचार किया ताकि वह खास कर दिवालियापन के संकट का सामाना कर रहे यूरोपीय देशों के लिए अधिक ऋण सहायता दे सके। ब्रिटेन ने वित्त मंत्री जार्ज आस्बोर्न ने कल यहां इन नेताओं की बैठक के बाद कहा कि चीन जैसे देशों ने इन प्रस्तावों में रुचि दिखाई। पर उन्होंने यह नहीं बताया कि मुद्राकोष के खजाने में इस समय और कितनी वृद्धि का प्रस्ताव है। यह प्रस्ताव ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरुन ने मुद्राकोष का पूंजी आधार बढाने के प्रस्ताव का जोरदार समर्थन किया। आसबोर्न ने संवाददाताओं से कहा कि विश्व समुदाय ने यह भी माना कि इस समय उसे दुनिया की सामान्य आर्थिक दशा पर ध्यान देने की जरूरत है और आईएमएफ के संसाधन बढ़ाने के बारे में बहस शुरू हो गई है, लेकिन अभी यह संपन्न नहीं हुई है। उल्लेखनीय है कि पिछले वैश्विक आर्थिक संकट के बीच जी20 के नेताओं ने मुद्राकोष के संसाधन को तीन गुना करने का निर्णय लिया था।

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