नई दिल्ली, 1 अक्टूबर. इंग्लैंड दौरे से पहले भारतीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की तूती बोलती थी लेकिन इंग्लैंड में टोटल सफ़ाई के बाद हालात बदल रहे हैं.एक्सलूसिव जानकारी के मुताबिक इंग्लैंड के खिलाफ एकदिवसीय श्रृंखला के लिए चयन कमेटी की बैठक में कप्तान की एक नहीं चली. उनके पसंदीदा क्रिकेटर टीम से बाहर कर दिए गए. श्रीकांत एंड कंपनी ने उन्हें साफ  संदेश दे दिया है कि कप्तान पर उनका भरोसा बरकरार है लेकिन आगे का रास्ता कप्तान को नई पौज को लेकर तय करना होगा. पंजाब के सितारा ऑफ  स्पिनर हरभजन सिंह, यूपी के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज आरपी सिंह और दिल्ली के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज आशीष नेहरा धोनी के पसंदीदा क्रिकेटर हैं. लेकिन टीम से इनका पत्ता साफ  हो गया है. चयनकर्ताओं ने ये जोखिम भरा फैसला तब लिया है. जब टीम में सचिन, सेहवाग और युवराज जैसे अनुभवी क्रिकेटर फि टनेस की वजह से बाहर हैं.

जैसे कि यही काफी नहीं सूत्रों की मानें तो चयनकर्ताओं ने कई दूरगामी फैसले लिए हैं. ये साफ  कर दिया गया है कि अब तमिलनाडु के ऑफ स्पिनर आरण् अश्विन टीम के पहले स्पिन गेंदबाज होंगे. हरभजन को घरेलू क्रिकेट के रास्ते दोबारा टीम में जगह हासिल करनी होगी. साथ ही वक्त आ गया है कि आशीष नेहरा से आगे वरुण एरोन, ए अरविंद और उमेश यादव जैसे तेज गेंदबाजों से आगे का विकल्प चुनना होगा. हरभजन सिंह ने इंग्लैंड दौरे पर 2 टेस्ट मैच खेले जिसमें 69.4 ओवर में 4.11 के इकॉनमी रेट से रन दिए. निराशाजनक खेल के बाद हरभजन अनफि ट हो गए. चैंपियंस लीग से पहले हरभजन ने दावा किया कि वो पूरी तरह से फि ट हैं. मुंबई इंडियंस के लिए उन्होंने कप्तानी भी की. इसके बावजूद उन्हें 2 एकदिवसीय से बाहर कर दिया गया है.

पिछले तीन सालों से हरभजन का खेल लगातार उतार पर है. आंकड़े इस बात के गवाह हैं, 54 मैचों में सिर्फ  64 विकेट उनकी साख के साथ मेल नहीं खाते. यही नहीं इस दौरान 4.30 का करियर इकॉनमी रेट रखने वाले हरभजन ने करीब 4.72 रन प्रति ओवर खर्च किए. सबसे हैरानी की बात ये कि 36 महीनों के दौरान वो सिर्फ  1 बार ही पारी में 5 विकेट ले पाए. यही नहीं इस दौर में भारत ने जो 15 मैच हारे उसमें सिर्फ  2 मैचों में ही हरभजन 3 विकेट ले पाए.

साफ  है हरभजन एक स्ट्राइक गेंदबाज की भूमिका निभाने में नाकाम हो रहे थे. वहीं दूसरी तरफ युवा आर अश्विन इंग्लैंड जैसे मुश्किल हालात में भी अपनी गेंदबाजी से सुर्खियां बटोर रहे थे. भज्जी को अब तक धोनी की दोस्ती बचा रही थी लेकिन अब सेलेक्शन कमेटी से साफ कर दिया है कि धोनी को भज्जी पर अश्विन को ही तरजीह देनी होगी.

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