नई दिल्ली, 5 जुलाई. नंबरों का खेल भाजपा को उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में भी अपना उम्मीदवार खड़ा करने से रोक रहा है। इससे पहले राष्ट्रपति चुनाव में भी उसने अपना कोई उम्मीदवार नहीं खड़ा किया। इसमें वह वह पीए संगमा को समर्थन दे रही है।

भाजपा उपराष्ट्रपति चुनाव में भी सीधे कांग्रेस से टक्कर नहीं लेगी क्योंकि संख्याबल उसके पक्ष में नहीं है। संभवना यह है कि वह अपने किसी सहयोगी दल के उपराष्ट्रपति पद के दावेदार को समर्थन देगी।एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि जब तक कि हमारा कोई नेता यह जानने के बाद भी कि वह इस पद के लिए चुनाव लड़ेगा/लड़ेगी, तो उसे हार का मुंह देखना पड़ेगा, हम अपना कोई उम्मीदवार नहीं खड़ा कर रहे हैं। वैसे यदि एनडीए का कोई घटक या गैर-कांग्रेसी दल उम्मीदवार खड़ा करता है, तो हम उसे अपना समर्थन देंगे। कांग्रेस की ओर से उपराष्ट्रपति चुनाव की दौड़ में जो नाम सामने आ रहे हैं, उनमें उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, आदिवासी मामलों के मंत्री वी किशोर चंद्र देव और नगालैंड के पूर्व मुख्यमंत्री एससी जमीर आगे हैं।

कांग्रेेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पार्टी ने राष्ट्रपति चुनाव की तरह ही उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार भी तय करने का अधिकार दे रखा है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रणब मुखर्जी के बाद अंसारी कांग्रेस अध्यक्ष की प्राथमिकता सूची में दूसरे स्थान पर थे। वैसे कांग्रेस का एक वर्ग कह रहा है कि उपराष्ट्रपति पद के लिए किसी आदिवासी चेहरे को आगे किया जाना चाहिए, ताकि राष्ट्रपति पद के लिए मुखर्जी को चुनौती दे रहे पीए संगमा के इस दावे को खारिज किया जा सके कि कांग्रेस आदिवासी उम्मीदवार का समर्थन नहीं करती। आंध्र प्रदेश के किशोर चंद्र देव, महाराष्ट्र व गोवा के राज्यपाल रह चुके जमीर आदिवासी दावेदार हो सकते हैं। पार्टी का एक वर्ग सुशील कुमार शिंदे का नाम उपराष्ट्रपति पद के लिए ले रहा, जो दस साल पहले भाजपा के भैरों सिंह शेखावत के विरुद्ध विपक्ष के उम्मीदवार थे। तब केंद्र में एनडीए की सरकार थी। शिंदे कांग्रेस का दलित चेहरा हैं। पंजाब के राज्यपाल का नाम भी दौड़ में शामिल है। उपराष्ट्रपति पद का चुनाव 7 अगस्त को होना है। हामिद अंसारी का कार्यकाल 10 अगस्त को खत्म हो रहा है।

राष्ट्रपति चुनाव : अदालत जाने की तैयारी में भाजपा

यूपीए के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी का रायसीना हिल्स पहुंचने का रास्ता लगभग साफ हो जाने के बावजूद राष्ट्रपति चुनाव को लेकर तकरार जारी है। प्रणब दा के नामांकन पत्र पर अपनी आपत्तियां दोहराते हुए भाजपा ने अब अदालत का दरवाजा खटखटाने का इरादा जताया है। दूसरी ओर, सरकार ने भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) से इस्तीफे से संबंधित भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए इसे बदनाम करने का प्रयास बताया है।

अदालत जाने की तैयारी में जुटी भाजपा को हालांकि अब चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार करना होगा। राष्ट्रपति व उप राष्ट्रपति कानून-1952 के तहत चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। अदालत इस चुनाव प्रक्रिया में दखल नहीं दे सकती। बुधवार को नामांकन पत्र वापस लेने का आखिरी दिन था। इधर, चुनाव आयोग ने निर्वाचन अधिकारी व राज्यसभा महासचिव को संगमा की मांगी जानकारी उपलब्ध कराने की अनुमति दे दी है। इससे पहले संगमा ने निर्वाचन अधिकारी से प्रणब के नामांकन पत्र पर उठाई आपत्तियों को खारिज करने के फैसले का विस्तृत विवरण मांगा था। भाजपा भी यह जानकारी पाने का इंतजार करती रही। इसके बाद ही पार्टी अपनी अगली रणनीति का ऐलान करेगी। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने अनंत कुमार, एसएस अहलूवालिया और सत्यपाल जैन के साथ इस मुद्दे पर अदालत जाने के विकल्प पर लगभग दो घंटे तक विचार-विमर्श किया। अहलूवालिया ने कहा कि पार्टी ने सभी विकल्प खुले रखे हैं।

जैन ने भी कहा कि भाजपा अदालत में याचिका डाल सकती है। वहीं दूसरी तरफ सरकार भी भाजपा के हमलों का जवाब देने के लिए तैयार है। गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने भाजपा के इस आरोप कि प्रणब मुखर्जी का भारतीय सांख्यकी संस्थान(आईएसआई) के चेयरमैन से इस्तीफा फर्जी है, को बदनाम करने वाला करार दिया है। भाजपा के अदालत जाने की योजना पर उन्होंने कहा कि सभी को कोर्ट जाने का अधिकार है। संसदीय कार्यमंत्री पवन बंसल ने भाजपा के आरोपों को गलत करार देकर खारिज कर दिया। बहरहाल, माना जा रहा है कि भाजपा चुनाव प्रचार में इस मुद्दे को हवा देने के बाद अदालत का दरवाजा भी खटखटा सकती है, जबकि सरकार ने भी अब भाजपा के आरोपों का जवाब देने के लिए कमर कस ली है।

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