ममता ने लिया यू-टर्न, टीएमसी- पीएम की बैठक खत्म

नई दिल्ली, 8 नवंबर. एक तरह से ममता बेनर्जी ने पेट्रोल पदार्थों की कीमतों की बात पर यू-टर्न ले लिया है. तृणमूल सांसदों और पीएम के बीच बैठक  के बाद तृणमूल के सांसद ने कहा कि उन्होंने ममता बनर्जी द्वारा आदेशित संदेश प्रधानमंत्री तक पहुंचा दिया है। उनका कहना है कि तृणमूल ने पीएम के साथ बैठक में महंगाई पर चिंता जताई है। साथ ही पेट्रोल के बढ़े दामों से वह नाखुश हैं।

इसी के साथ यह भी साफ हो गया है कि पेट्रोल के बढ़े दाम अब कम नहीं होंगे। इसके अलावा तृणमूल सांसदों ने मीडिया में गैस, डीजल, और केरोसिन के दाम बढ़ाने की आ रही खबरों  के बाद सरकार के ऐसे किसी कदम के विरोध करने की बात कही। वहीं, तृणमूल सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि पीएम को ऐसी किसी खबर जो गैस, डीजल, और केरोसिन के दाम बढ़ाने से जुड़ी थी के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने पीएम से ऐसे महत्वपूर्ण फैसलों में साथी दलों की राय जानने का भी अनुरोध किया। साथ ही उनका कहना था कि उन्होंने बंगाल के लिए प्रधानमंत्री से विशेष पैकेज देने की बात कही।

पेट्रोल के दाम में ताजा बढ़ोतरी पर समर्थन वापसी की धमकी देकर यूपीए में बेचैनी बढ़ा चुकी तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी महंगाई पर तो आक्रामक हैं लेकिन रौलबैक को लेकर बैकफुट पर नजर आ रही हैं। यूपीए में उठे सियासी तूफान को थामने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से तृणमूल सांसदों की मंगलवार को हो रही मुलाकात से ठीक पहले ममता ने तीखे अंदाज में यह तो कहा कि महंगाई के मुद्दे पर वह कोई समझौता नहीं करेंगी लेकिन उनकी पार्टी ने रौलबैक की मांग से कन्नी काट लिया है। जाहिर है कि पेट्रो मूल्य वृद्धि को वापस लेने की मांग पर ममता अपने पहले के रुख से पलट गई हैं। तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि हम रौलबैक की मांग नहीं कर रहे हैं। हमारा ध्यान तो महंगाई से त्रस्त आम आदमी की शिकायत दूर करने पर है। इससे यही संकेत पढ़े जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री से चर्चा में तृणमूल के सभी 24 सांसद महंगाई को लेकर भले ही तेवर तीखे रखें लेकिन रौलबैक की मांग से किनारा कर लेंगे।  जानकार तो इसे पश्चिम बंगाल के लिए बीस हजार करोड़ का बड़ा पैकेज लेने के मकसद से केंद्र सरकार पर ममता के दबाव बनाने की सियासत के तौर पर भी देख रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार सूबे की बिगड़ी आर्थिक दशा पर तो वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने चिंता तो जताई लेकिन सिर्फ नौ हजार करोड़ रुपये देने का ही आश्वासन दे सके। इससे दीदी ने दादा पर दबाव बनाने के लिए पेट्रोल कीमत के रौलबैक पर समर्थन वापसी का सियासी दांव चला। दीदी तो प्रधानमंत्री से मुलाकात में नहीं रहेंगी लेकिन यहां से कोलकाता लौटकर जाने वाले सांसदों से पूरा फीडबैक मिलने के बाद ही अपने अल्टीमेटम को वापस लेंगी। बंदोपाध्याय ने कहा कि हम सरकार से बेहतर समन्वय बनाकर चलने की अपेक्षा कर रहे हैं। वहीं, मूल्य वृद्धि पर एनसीपी के बाद द्रमुक और नेशनल कांफ्रेंस ने भी यूपीए के साथ दृढ़ता से खड़े रहने का संकल्प दोहराया है।

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