नई दिल्ली, 18 सितंबर. महंगाई से बेहाल आम जनता के लिए ब्याज दरें बढऩे से सिर्फ घर लेने का सपना नहीं टूटा है, बल्कि नौकरीपेशा वर्ग के लिए कर्ज लेकर अपने बच्चों को पढ़ाना भी दूभर होता जा रहा है.

महंगाई को काबू में करने के नाम पर बढ़ी ब्याज दरों ने बीते डेढ़ साल में एजुकेशन लोन पर ब्याज दरों को चौदह प्रतिशत से भी ऊपर पहुंचा दिया है.
बीते डेढ़ साल में रिजर्व बैंक महंगाई पर काबू पाने की कोशिशों में लगा है और इस प्रक्रिया में उसकी प्रमुख ब्याज दरें सवा पांच प्रतिशत से बढ़कर सवा आठ प्रतिशत तक पहुंच गई है. रिजर्व बैंक के इस कदम से जनता पर महंगाई की मार तो कम नहीं हुई लेकिन घर से लेकर घर का सामान और गाड़ी से लेकर पढ़ाई के लिए मिलने वाला कर्ज और महंगा होता चला गया है. होम लोन की दरें बीते डेढ़ साल में लगभग दो प्रतिशत बढ़ गई हैं तो वाहन खरीदने के लिए मिलने वाले कर्ज में भी इतनी ही बढ़ोतरी हुई है.

महंगाई के बोझ तले मध्यवर्ग को डेढ़ साल पहले तक बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए बहुत ज्यादा माथापच्ची नहीं करनी होती थी. इसकी वजह थी सस्ते एजुकेशन लोन. लेकिन महंगाई बढऩे के साथ एजुकेशन लोन लेना भी मध्यवर्गीय परिवारों के लिए मुश्किल होता जा रहा है.
बीते साल जून तक साढ़े सात लाख रुपये तक के एजुकेशन लोन पर ब्याज की दर 12.5 प्रतिशत थी. लेकिन शुक्रवार को ब्याज दरों में हुई वृद्धि के बाद एजुकेशन लोन पर ब्याज की दर 14.25 प्रतिशत तक पहुंच गई है.

यही हाल व्यक्तिगत ऋणों का है. इस पर भी ब्याज की दर बेतहाशा बढ़ी है. हालांकि सरकारी बैंकों से कर्ज लेने में अभी भी कुछ राहत है. इसके बावजूद व्यक्तिगत कर्ज की दरें 18.50 प्रतिशत तक पहुंच गई है.

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