दूतावास में घुसे प्रदर्शनकारी, जलाई गाडिय़ां

यमन, 13 सितंबर. विवादित अमेरिकी फिल्म के खिलाफ गुस्सा अब यमन में भी सड़कों पर उतर आया है। इस अमेरिकी फिल्म के खिलाफ यमन में प्रदर्शनकारियों ने कई गाडिय़ों में आग लगा दी है।

अमेरिका में बनी एक फिल्म में पैगम्बर मोहम्मद साहब के कथित अपमान से नाराज प्रदर्शनकारियों ने गुरुवार को यमन स्थित अमेरिकी दूतावास में दाखिल हो कर तोडफ़ोड़ की और वाहनों को आग के हवाले कर दिया। प्रदर्शनकारियों को दूतावास में प्रवेश करने से रोकने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने फायरिंग की लेकिन वे असफल रहे। प्रदर्शनकारियों ने दूतावास के अहाते में घुसकर तोडफ़ोड़ की और वाहनों को आग के हवाले कर दिया। इससे पहले के घटनाक्रम में लीबिया के बेनगाझी स्थित अमेरिकी कॉन्सुलेट के दफ्तर पर मंगलवार को हुए हमले में अमेरिकी राजदूत क्रिस्टोफर स्टीवेंस की मौत हो गई थी। इसके बाद अमेरिका ने सख्त तेवर अपनाए हैं। उसने अपने दो विध्वंसक पोत लीबिया की ओर रवाना कर दिए हैं। त्रिपोली स्थित दूतावास की सुरक्षा के लिए मरीन टीम की तैनाती कर दी गई है।

राजदूत के हत्यारों को सजा होगी
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा लीबिया केबेनगाजी में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले में मारे गए अमेरिकी राजदूत जॉन क्रिस्टोफर स्टीवंस समेत अन्य तीन अमेरिकियों के हत्यारों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए दृढ़ संकल्प हैं। ओबामा ने कहा कि अमेरिका इस आतंकी घटना के दोषियों पर कार्रवाई में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। हमले के बाद दुनिया भर में अमेरिकी राजनयिकों की सुरक्षा दुरुस्त कर दी गई है।

उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि इस हमले के बावजूद लीबिया की नई सरकार और अमेरिका के रिश्तों पर कोई आच नही आएगी। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि अमेरिका इस घटना की जांच कर रहा है। अधिकारियों ने प्राथमिक अनुमान लगाया है कि यह हमला अचानक नहीं हुआ है, बल्कि यह पूर्व नियोजित कोई योजना थी। उधर,अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में प्रतिद्वंद्वी के तौर पर खड़े होने वाले रिपब्लिकन पार्टी के नेता मिट रोमनी ने भी इस हमले की आलोचना की।

गौरतलब है कि अमेरिका में निर्मित इस्लाम विरोधी एक फिल्म से गुस्साई भीड़ ने मंगलवार रात लीबिया के दूसरे सबसे बड़े शहर बेनगाजी में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास में घुसकर अमेरिकी राजदूत क्रिस्टोफर स्टीवंस और तीन अन्य अमेरिकी कर्मचारियों की हत्या कर दी। हजारों सशस्त्र प्रदर्शनकारियों ने दूतावास को भी आग के हवाले कर दिया। 1979 में काबुल में अफगानिस्तान में तैनात अमेरिकी राजदूत एडॉल्फ डब्स की हत्या भी इसी प्रकार से की गई थी। विवादित फिल्म के विरोध में लीबिया से पहले मिस्र में प्रदर्शन हुए।

काइरो में सैकड़ों लोगों की भीड़ ने अमेरिकी दूतावास में घुसकर वहां इस्लाम के झंडे लहरा दिए। चूंकि ये दोनों घटनाएं 9/11 की 11वीं बरसी के दिन ही घटीं इस कारण अमेरिका समेत दुनिया भर में प्रतिक्रिया हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने बेनगाजी दूतावास में हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने दुनिया भर में तैनात अमेरिकी राजनयिकों की सुरक्षा बेहद कड़ी करने के आदेश दिए हैं। विवादित फिल्म को बनाने में अमेरिकी पादरी टेरी जोंस की भी भूमिका बताई जा रही है। उन्होंने पिछले साल 9/11 की 10वीं बरसी पर कुरान की प्रतियां जलाने की घोषणा की थी। हालांकि उस वक्त उन्हें ऐसा करने से रोक दिया गया था, लेकिन उनकी घोषणा के बाद दुनिया भर में अमेरिका विरोधी प्रदर्शनों ने हिंसक रूप धारण कर लिया था। लीबिया के आंतरिक मामलों के मंत्री वानिस अल शरीफ ने बताया कि राजदूत क्रिस्टोफर और तीन अन्य अमेरिकियों पर रॉकेट से हमला किया गया, जिसमें ये चारों मारे गए।

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