इन्दौर. 1 नवंबर. (व्यापार प्रतिनिधि) पिछले पखवाड़े में त्योहारी सीजन के चलते प्रदेश की मंडियों में कपास की आवक सीमित चल रही थी। लेकिन नवंबर के प्रथम सप्ताह से मंडियों में कपास की आवक काफी बढ़ जाएगी। कारोबारियों का कहना है कि आवक बढऩे से रुई की कीमतों में गिरावट आ सकती है। दीपावली मुहूर्त सौदे में 30 एमएम रुई का भाव 38,500-39,000 रुपये प्रति कैंडी रहा।

कपास के ब्रोकर विशाल जोगी का कहना है कि नए कपास वर्ष में उत्पादन रिकॉड स्तर पर पहुंचने की संभावना है। इधर, भारतीय कपास निगम द्वारा इस बार मध्य प्रदेश में 17 लाख गांठ कपास उत्पादन का अनुमान लगाया गया है। कपास उत्पादन में बढ़ोतरी की वजह प्रदेश में कपास का रकबा बढऩा है। इस बार राज्य में गत वर्ष के 6.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के मुकाबले 6.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की फसल बोई गई है।

फिलहाल मध्य प्रदेश की मंडियों में 28 एमएम रुई के भाव 35000 रुपये से 36000 रुपये प्रति कैंडी और 29 एमएम रुई की कीमत 37000-37700 रुपये प्रति कैंडी चल रहे हैं।
घरेलू बाजार में दस अक्टूबर को शंकर-6 किस्म की कपास का भाव 39,000 से 39,200 रुपये प्रति कैंडी था जो बढ़कर 39,500 से 39,700 रुपये प्रति कैंडी हो गया। निर्यातकों की मांग बढऩे से कपास की कीमतों में तेजी बनी हुई है। पिछले दस दिनों में इसकी कीमतों में 500 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी-356 किलो) की तेजी आ चुकी है। अहमदाबाद में शंकर-6 किस्म की कपास का भाव बढ़कर शनिवार को 39,500 से 39,700 रुपये प्रति कैंडी हो गया। नवंबर में आवक बढऩे पर कपास की कीमतों में नरमी आ सकती है।

गुजरात के साथ ही महाराष्ट्र में भी आवक बढ़ेगी- कपास की दैनिक आवक तो बढ़ी है लेकिन निर्यातकों के साथ ही लोकल मिलों की अच्छी मांग बनी हुई है जिससे पिछले दस दिनों में कपास की कीमतों में 500 रुपये की तेजी आ चुकी है। अब आवक बढऩे पर भावों में नरमी का ध्यान है. नवंबर में गुजरात के साथ ही महाराष्ट्र में भी आवक बढ़ेगी जिससे कीमतों में गिरावट आने की संभावना है।

कुछ व्यापारियों का यह भी मानना है कि निर्यातकों ने अगाऊ सौदे कर रखे हैं इसीलिए निर्यातकों की मांग बढ़ी हुई है। जबकि लेबर की समस्या होने के कारण पंजाब, हरियाणा, राजस्थान में कपास की आवक भी कम हुई है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में आवक घटकर 9,000 से 1,000 गांठों (एक गांठ-170 किलो) की रह गई जबकि चालू महीने के शुरू में 20,000 गांठों से ज्यादा आवक हो रही थी.

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