लेफ्ट की वोटिंग और पृथक तेलंगाना के शोर में दूसरे दिन भी नहीं चल सकी संसद

नई दिल्ली, 23 नवंबर. विपक्ष के भारी हंगामे के चलते शीत सत्र के दूसरे दिन भी संसद नहीं चल पाई। बुधवार को भी समूचे विपक्ष ने विभिन्न मसलों पर एकजुट और आक्रामक रुख बरकरार रखा। हंगामे की वजह से लोकसभा और राज्यसभी की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई है। दूसरी ओर वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने वामदलों के साथ बैठक में मध्यावधि चुनाव का डर जताया है।

  •  वोटिंग के साथ बहस की मांग

वाम दलों ने लोकसभाध्यक्ष से मूल्य वृद्धि पर उनका स्थगन प्रस्ताव स्वीकार करने का अनुरोध किया है। जबकि सरकार नियम 193 के अधीन इस पर चर्चा कराने को तैयार है। इस नियम के तहत मतदान का प्रावधान नहीं है। लेफ्ट महंगाई के मुद्दे पर वोटिंग के साथ बहस की मांग कर रहा है। लेफ्ट का कहना है कि वह वोटिंग इसलिए चाहते हैं कि सरकार पर महंगाई रोकने के लिए दबाव बने।

…तो होना पड़ेगा शर्मिंदा
लेफ्ट के नेताओं के साथ लंच पर हुई बातचीत में प्रणब ने कहा कि अगर वह वोटिंग के साथ बहस कराने के लिए दबाव डालेंगे तो सरकार को शर्मिंदा होना पड़ सकता है। मध्यावधि चुनाव तक की नौबत आ सकती है। इस पर सीताराम येचुरी ने वित्त मत्री से कहा कि सरकार तब गिरेगी जब आप वोटिंग में हारेंगे।

  •  कल तक संसद स्थगित

तेलंगाना राष्ट्र समिति के सदस्य पृथक तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर हाथों में तख्तियां लिए हंगामा कर रहे थे. द्रमुक सदस्य  अध्यक्ष के आसन के समीप पहुंचकर नारेबाजी कर रहे थे लेकिन यह स्पष्ट नहीं हुआ कि वे क्या मुद्दा उठाना चाहते थे.हंगामे व नारेबाजी की वजह से लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी. जब दोबारा सदन की कार्यवाही आरम्भ हुई तो स्थिति ज्यों की त्यों बनी रही. हंगामा न थमता देख लोकसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी.

केंद्र जिम्मेदार नहीं : कांग्रेस

आम जनता को बेलगाम महंगाई से निजात दिलाने की बजाए केंद्र सरकार अब इसके लिए महज जिम्मेदारी तय करती नजर आ रही है. सरकार ने महंगाई के मुद्दे पर विपक्ष को भी आड़े हाथों लिया है. सरकार ने कहा है कि महंगाई से निपटना अकेले केंद्र की जिम्मेदारी नहीं है. उसने कहा कि विपक्ष को किसी नियम विशेष पर चर्चा कराने की मांग पर अड़कर संसद की कार्यवाही बाधित करने के बजाय रचनात्मक सुझाव देने चाहिये. संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘महंगाई पर स्वस्थ चर्चा होनी चाहिये. सरकार हर एक बात का जवाब देना चाहेगी, लेकिन विपक्ष सिर्फ हंगामा करना चाहता है. वह महंगाई कम करने के लिये रचनात्मक सुझाव नहीं देना चाहता. मतदान के प्रावधान वाले नियम के तहत महंगाई के मुद्दे पर चर्चा कराने की विपक्षी दलों की मांग पर उन्होंने कहा, ‘विपक्ष को किसमें दिलचस्पी है? महंगाई के मुद्दे पर चर्चा कराने में या मतदान के प्रावधान वाले नियम में? उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को मतदान के प्रावधान वाले नियमों पर जोर नहीं देना चाहिये. विपक्ष को यह समझना चाहिये कि महंगाई कम करना अकेले केंद्र की जिम्मेदारी नहीं है. कई जरूरी वस्तुएं ऐसी हैं, जिनकी कीमतों में राज्य सरकारें भी कदम उठाकर कमी ला सकती हैं.

ठीकरा विपक्ष पर न फोड़ें

भाजपा ने विपक्ष पर संसद में कामकाज नहीं होने देने के सरकार के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए आज कहा कि संसद को चलाने की पहली जिम्मेदारी सरकार की है और आम आदमी से जुडे ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग गैर कानूनी नहीं है.  एस एस अहलूवालिया ने कहा कि मीडिया में सरकार द्वारा विपक्ष पर लगाये गये आरोप सही नहीं है. भाजपा शुरू से कहती आ रही है कि वह संसद का कामकाज रोकना नहीं चाहती लेकिन ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की मांग करना उसका अधिकार है. उन्होंने कहा कि विपक्ष की ओर से महंगाई और काले धन पर दिये गये काम रोको प्रस्ताव संसदीय प्रावधानों के अनुरूप दिये गये हैं. इन पर चर्चा कराकर संसद को चलाने की पहली जिम्मेदारी सरकार की है न कि विपक्ष की. उन्होंने कहा कि मीडिया में संसद के न चलने का ठीकरा विपक्ष के सिर फोडा जा रहा है. यह कहा जा रहा है कि इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होनी है और कई पेश किये जाने हैं. भाजपा यह स्पष्ट करना चाहती है कि उसकी मंशा काम रोकना नहीं है. सदन को चलाना सरकार की मंशा पर निर्भर करता है. उन्होंने कहा कि आज संसद में तेलंगाना के मुद्दे पर कांग्रेस के सांसद आसन के पास पहुंच गये. उनका कहना है कि तेलंगाना मुद्दे के समाधान के बिना वे संसद नहीं चलने देंगे. इसके अलावा द्रविड मुनेत्र कष्गम के सांसद भी आसन के पास थे.

 

 

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