भोपाल,28 अप्रैल. प्रदेश के प्राइवेट एवं शासकीय स्कूलों में पढने वाली साठ प्रतिशत किशोरियों में खून की कमी पाई गई. यह तथ्य महिला एवं बाल विकास द्वारा हाल ही में कराए गए स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान उजागर हुआ.

किशोरियों में व्याप्त खून की कमी को दूर करने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग आने वाले सत्र में संयुक्त अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है. इसके अंतर्गत किशोरियों को आयरन की गोलियां वितरित की जाएगी. साथ ही उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा. महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक ने बताया कि अभियान प्रदेश के सभी शासकीय एवं अशासकीय स्कूलों में शुरु किया जाएगा. इसके अंतर्गत स्कूलों में अध्ययनरत 11 से 17 साल की किशोरियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा. किशोरियों के रक्त में हीमोग्लोबिन की जांच की जाएगी. जिन किशोरियों में गंभीर एनिमिया पाया जाएगा,उन्हें अस्पताल रेफर कर दिया.

आयरन व कृमि नाशक एल्बेंडाजोल की गोलियां खिलाएंगे

किशोरियों का किया जाएगा पंजीयन – स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान पाई गई एनीमिक किशोरी का आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा उसका पंजीयन किया जाएगा. इसके बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उन किशोरियों के परिवार वालों से संपर्क पोषण आहार संबंधी जानकारी देंगी. साथ ही उसे आयरन की गोलियों को पूरा कोर्स अपनी निगरानी में कराएगी.

क्या है एनीमिया – लौह तत्व कमी से खून में पाए जाने वाले हीमोग्लोबिन का बनना कम हो जाता है. हीमोग्लोबिन शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है. इसके अभाव में थकान, चक्कर आना, त्वचा का पीला होना , सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं. ज्यादा एनीमिक होने से मौत का भी खतरा बढ़ जाता है.

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