भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

नई दिल्ली, 16 जुलाई. आर्थिक सुधारों पर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की नसीहत भारत सरकार को नहीं भायी है। सरकार के ओर से तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए कॉरपोरेट मामले के मंत्री वीरप्पा मोइली ने वोडाफोन का नाम लेते हुए कहा कि एक खास इंटरनैशनल लॉबी भारत के बारे में गलत बातों को हवा देने में लगी है। वहीं, इस ममाले में बीजेपी के सीनियर नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि अगर ओबामा का इशारा रीटेल में एफडीआई पर है, तो जरूरी नहीं कि हम भी उन्हीं की तरह सोचें।

भारत में निवेश का माहौल पहले से खराब होने, अब भी नियमों की सख्ती बनी रहने, रिटेल और कई सेक्टरों में बहुत-सी पाबंदियों का जिक्र अमेरिकी प्रेजिडेंट ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में किया है। ओबामा ने इस माहौल पर चिंता जताते हुए यह भी कहा है कि भारत को अपने लिए रास्ता खुद तय करना है। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होने वाला है और जानकारों का मानना है कि रीटेल और कई दूसरे सेक्टर की लॉबी का बड़ा दबाव ओबामा पर है। यही वजह है कि विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन कोलकाता में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात करने पहुंच जाती हैं।

उसके बाद भी नतीजे आते न देखकर अब खुद अमेरिकी प्रेजिडेंट के कॉमेंट सामने आते हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि अमेरिका की तरफ से ओबामा के बयान पर जल्द ही कुछ सफाई आ सकती है। ओबामा के बयान पर सीआईआई, एसोचैम और अन्य संगठनों की राय भी सामने आई है। कहा गया है कि इंडिया में इन्वेस्टमेंट का माहौल ठीक है। ग्लोबल मंदी के नए दौर में इंडियन इकॉनमी कई विकसित देशों के मुकाबले आगे चलते हुए 6 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है।

वीरप्पा मोइली ने प्रतिक्रिया में कहा, इंटरनेशनल लॉबी इस तरह की अटकलों को हवा दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने जो कहा, उससे यही लगता है कि उन्हें भारतीय हालात के बारे में उचित जानकारी नहीं दी गई है। मोइली ने सीधे तौर पर वोडाफोन का नाम लिया। उन्होंने कहा इस तरह की लॉबी भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में दुनिया को गलत जानकारी देने में लगी है। लेफ्ट पार्टियों और समाजवादी पार्टी ने भी कहा है कि अमेरिका के कहने से भारतीय अर्थव्यवस्था को खुला नहीं किया जा सकता है।

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