सहकारी संस्थाओं में खाद नहीं, बाजार में कालाबाजारी

सांवेर, 20 नवंबर. क्षेत्र के किसान यूरिया खाद की किल्लत से बुरी तरह परेशान है. सहकारी संस्थाओं में यूरिया नहीं है. और बाजार में यूरिया की खुलेआम कालाबाजारी हो रही है. सरकारी भाव युरिया का 284 रुपए प्रति बैक (50 किलो) है, जबकि कालाबाजारी में 450 रुपए प्रति बैग में बेचा जा रहा है. किसानों की मजबूरी है. कि फसल के लिए ज्यादा भाव देकर भी यूरिया खरीदना पड़ रहा है.

क्षेत्र की सहकारी संस्थाओं में किसानों को 284 रुपए प्रतिबैग के भाव से यूरिया मिलता है. मगर संस्थाओं में एक पखवाड़े से युरिया नहीं आया है. किसान हर रोज संस्था प्रबंधको से संपर्क करते है. और हर रोज निराशाजनक जवाब मिल रहा है. सांवेर सहकारी विपणन संस्था (मार्केटिंग सोसायटी) के प्रबंधक रमेशचन्द दयाल कहते है. कि हर रोज आश्वासन मिलता है. कि कल रैक लगने वाली है. मगर फिर वही हालत रहती है. किसानों को आश्वासन दे-देकर परेशान हो गए है. सहकारी संस्थाओं में भले ही 15 दिनों ले यूरिया का अभाव है. मगर तेहसील मुख्यालय सांवेर समेत क्षेत्र के चन्द्रावतीगंज, धरमपुरी, मांगल्या, शिप्रा, अछालिया आदि गांवों में भी कालाबाजारी करने वाले व्यापारियों के पास जितने चाहो उतनी बोरी यूरिया मिल रहा है. वहां 284 रुपए नहीं बल्कि 450 रुपए का भुगतान किसानों को करना पड़ रहा है. सवाल यही उठ रहा है. कि व्यापारियों के पास इतनी मात्रा में यूरिया कहां से आ गया या आ रहा है. जो किसानोा को देडग़ुना भाव में सहज उपलब्ध करा रहे है.

किसानों की मजपूरी है अधिक दाम चुकाना…
किसानों के लिए ज्यादा दाम चुकाकर भी यूरिया लेना अपरिहार्य है. क्योकि यूरिया की जरुरत किसानों आज है. बाद में यूरिया मुफ्त में भी मिले तो किस काम का? जिन्दाखेड़ा के पूर्व सरपंच छगनलाल घोडेला का कहना है. कि गेहू की बोवनी के बाद पहली सिंचाई में प्रति बीघा एक बोरी यूरिया लगता है. और बगैर यूरिया केसिंचाई नहीं कर सकते. सिंचाई जरुरी इसलिए यूरिया जिस भाव में भी मिले खरीदाना पड़ रहा है. सोसायटी में यूरिया नहीं है. इसलिए 450 रुपए के भाव पर यूरिया खरीदकर फसल सींच रहे है. क्षेत्र के लगबग हर किसान की यही पीड़ा है.

जिम्मेदार तंत्र मूकदर्शक बना बैठा
किसानों को निर्धारित दर पर युरिया नहीं मिल रहा है. और बाजार में यूरिया की खुलेआम कालाबाजारी हो रही है. मगर किसानों को निर्धारित दर पर सहज रुप से यूरिया उपलब्ध करवाने के साथ ही इसकी कालाबाजारी को रोकने केलिए जिम्मेदार सरकारी तंत्र

व्यापारी बोले हम मजबूर…
खाद की कालाबाजारी करने वाले व्यापारी भी अपकी मजबूरी जाहिर कर रहे है. सांवेर के एक खाद विक्रेता का कहना है. कि ज्यादा दाम वसूल रहे है. तो ये हमारी मजबूरी है. क्योंकि फिलहाल जो धारा चल रहा है. उसके तहत भाड़ा व हम्माली हमें देना पड़ रही है. जो सामान्य तौर पर कंपनी अदा करती है. डीलर जो सामान्य तौर पर कंपनी अदा करती है. डीलर हर गाड़ी (15 टन युरिया) पर वर्तमान में अनावश्यक  उर्वरक (सलफर या झाइम) भी पहले खरीदने पर ही यूरिया दे रहा है. जो 40-45 हजार रु. का पड़ रहा है. यही नहीं ऊपर से लकर नीचे तक रु. बांटना पड़ रहे है. इसी वजह से 400 रु. में यूरिया बैंग बेच रहे है.

अब कोई किसान हमें बिल लाकर बताऐ कि व्यापारी ने यूरिया ज्यादा दाम लेकर दिया. तो कार्रवाई करें. यदि बिल नहीं दे तो लिखित में शिकायत करें तो भी कार्रवाई कर देंगें. यदि किसी व्यापारी के गोदाम में यूरिया होने की जानकारी दी जाऐगी तो हमारे अधिकारी को भेजकर किसानों को यूरिया बंटवा देंगे. मगर कोई आगे तो आऐ.
रामनरेशसिंह भदौरिया
(वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी, सांवेर)

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