निश्चित ही श्री अन्ना हजारे के अनशन-आंदोलन से लोकपाल विधेयक संसद में आ रहा है और उन्हीं की मांग के अनुसार संसद का सत्र बढ़ाकर इसे पेश व पारित भी किया जाएगा.

केबिनेट ने लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देते हुए उसे मंजूर कर लिया और लोकपाल प्रणेता श्री अन्ना हजारे ने इस विधेयक को नामंजूर कर दिया. सरकार 22 दिसम्बर को इसे लोकसभा में पेश करेगी. इसी से संबंधित सिटीजन चार्टर विधेयक 20 दिसम्बर को लोकसभा में पेश कर दिया गया. इसके अलावा जुडीशियल अकाउंटेबिलीटी विधेयक और विह्सल ब्लोअर विधेयक लोकपाल बिल के साथ ही पेश किये जाने की संभावना है.  दूसरी ओर अन्ना हजारे ने लोकपाल विधेयक के प्रारूप को नामंजूर करते 27 से 29 दिसम्बर तक अनशन और 30 दिसम्बर से 1 जनवरी तक जेल भरो आंदोलन की घोषणा कर दी. इसके अंतराल में 30 दिसम्बर को वे कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के दिल्ली निवास पर धरना देंगे.

अन्ना यह चाहते थे कि जैसा लोकपाल विधेयक उन्होंने सुझाया है वैसा ही विधेयक बनाया जाये और वे यह भी समझते ही होंगे कि सरकार व राजनैतिक दल इसे नहीं मानेंगे और विधेयक वैसा ही बनेगा जैसा कि सरकार, विपक्ष व संसद चाहेगी. इस पर वे कोई असहमति बता विधेयक को नामंजूर कर आंदोलन व चुनावों में कांग्रेस के विरुद्ध प्रचार करने पहुंच जायेंगे. ऐसा प्रगट रूप में सामने आ रहा है कि लोकपाल को मुद्दा बनाना भी अन्ना का राजनैतिक मंसूबा था और वे असहमति बनाकर चुनाव प्रचार से राजनीति में प्रवेश कर रहे हैं. सरकार द्वारा स्वीकृत प्रारूप विधेयक में प्रधानमंत्री कुछ प्रावधानों के साथ इसके दायरे में रहेंगे. सीबीआई को जो मामले लोकपाल भेजेंगे उनकी रिपोर्ट सीधे लोकपाल को भेजी जायेगी. सीबीआई के डायरेक्टर का चयन एक समिति करेगी. अन्ना ने यह कह दिया है कि अब सरकार अपने रास्ते पर जाये और वे उनके रास्ते पर जायेंगे. इसका परिणाम यह होगा कि लोकपाल विधेयक कानून बनेगा और लोकपाल पर आंदोलन भी जारी रहेगा. चुनाव वाले राज्यों में प्रचार फरवरी तक चलेगा और उसके साथ ही अन्ना के आंदोलन की परिणित भी हो जायेगी. लोकपाल विधेयक के साथ ही जो अन्य तीन विधेयक लाये गए हैं उससे भ्रष्टाचार के विरुद्ध सशक्त कानूनी परिवेश बन ही जाता है. न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार के विरुद्ध भी जांच व कार्यवाही होगी. अफसरों को जनता के कार्य समयबद्ध होकर करना होंगे और जो लोग ऐसे मामलों को सामने लायेंगे उन्हें कानूनी संरक्षण देने का भी प्रावधान है. अभी ऐसे मामले सामने आए हैं कि जिन लोगों ने सूचना का अधिकार कानून के तहत मामले उठाए हैं उन पर हमले हुए हैं.अब प्रयोग में आने पर ही यह साबित होगा कि लोकपाल व उससे संबंधित विधेयक कितने कारगर हैं.

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