अन्ना की मांगे दरकिनार, 22 को संसद में पेश होगा लोकपाल

नई दिल्ली, 20 दिसंबर.  मंगलवार शाम को केंद्रिय कैबिनेट से लोकपाल बिल को मंजूरी मिलने के बाद सरकार ने लोकपाल बिल को सदन में 22 दिसंबर को पेश करने का फैसला लिया है. सरकार की ओर से यह भी  साफ कर दिया गया है कि सीबीआई लोकपाल के दायरे में नहीं आएगी. सीबीआई सिर्फ उन मामलों में ही लोकपाल को रिपोर्ट करेगी जिन्हें लोकपाल सीबीआई को सौंपेगा. दूसरी ओर टीम अन्ना सीबीआई को लोकपाल के दायरे में लाने पर अड़ी है.

कैबिनेट की बैठक में  सरकारी लोकपाल पर मुहर लग गई है. अब इसे गुरुवार को सदन में पेश किया जाएगा. लोकपाल की बैंच में आठ सदस्य होंगे और एक चैयरमेन होगा. लोकपाल बैंच में 50 प्रतिशत आरक्षण भी होगा साथ ही पीठ के आधे सदस्य न्यायिक क्षेत्र से होंगे.  सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस, या सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज या फिर कोई प्रख्यात व्यक्ति ही लोकपाल बैंच के चैयरमेन बन सकेंगे. पांच सदस्यों  का बोर्ड लोकपाल के सदस्यों का चुनाव करेगा. इसमें राष्ट्रपति या उनका प्रतिनिधि, प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता विपक्ष, लोकसभा अध्यक्ष और राष्ट्रपति द्वारा चयनित एक ज्यूरिस्ट होगा. सरकारी लोकपाल  के दायरे में ग्रुप-सी के कर्मचारी नहीं आएंगे. पीएम भी कुछ शर्तों के साथ दायरे में होंगे. वहीं लोकपाल के पास जांच करने के लिए अपनी टीम होगी. सीबीआई लोकपाल के दायरे से मुक्त रहेगी, यदि लोकपाल किसी मामले की जांच सीबीआई को सौपेंगा तो सीबीआई उसकी जांच करेगी.

संशोधन की मांग करेगी  बीजेपी
भाजपा ने फैसला किया है कि अगर लोकपाल विधेयक में उसके सुझावों एवं चिंताओं को शामिल नहीं किया गया तो वह इसमें संशोधन की मांग करेगी.  इस आशय का निर्णय पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में भाजपा संसदीय दल की बैठक में किया गया. इसमें सुषमा स्वराज, अरूण जेटली समेत अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए. बैठक में लोकपाल विधेयक पर चर्चा हुई. एस एस अहलुवालिया ने कहा कि बैठक में लोकपाल विधेयक पर चर्चा हुई. हमें जानकारी मिली है कि सरकार नए विधेयक में विभिन्न राजनीतिक दलों के सुझावों पर काम कर रही है. उम्मीद है कि वह आज इस पर कोई निर्णय करेंगे. जब विधेयक पर मंत्रिमंडल चर्चा करने के बाद मंजूरी दे देगा और नया विधेयक सामने आ जाएगा तब हम इसकी बारीकियों पर गौर करेंगे. हम यह देखेंगे कि स्थाई समिति के समक्ष और सर्वदलीय बैठक के दौरान रखे गए हमारे सुझावों को शामिल किया गया है या नहीं.

इसके बाद ही हम कोई निर्णय करेंगे. अगर हम पाएंगे कि हमारे सुझावों को नहीं शामिल किया गया है तब हमें विधेयक में संशोधन के लिए आगे बढऩे पर मजबूर होना पड़ेगा. भाजपा नेता ने कहा कि वित्ता मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कल लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, अरूण जेटली और यशवंत सिन्हा से वित्तीय सुधार विधेयक पर चर्चा की और पार्टी का समर्थन मागा. उन्होंने कहा कि चर्चा के बाद उन्होंने स्थाई समिति की रिपोर्ट को स्वीकार करने पर सहमति दी जबकि पहले मंत्रिमंडल ने पेंशन विधेयक पर इसे अस्वीकार कर दिया था. अहलुवालिया ने बताया कि साल 2009 में पेश कंपनी विधेयक के बारे में कारपोरेट जगत की काफी सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है और नया कंपनी विधेयक तैयार किया है. हमने मांग की है कि इसे स्थाई समिति के समक्ष भेजा जाना चाहिए, जो बजट सत्र से पहले सिफारिश दे देगा.

प्रधानमंत्री ने धोखा दिया

सशक्त लोकपाल की मांग को लेकर अन्ना हजारे ने  मनमोहन सिंह ने लोकपाल के मुद्दे पर धोखा दिया है. सरकार की नीयत साफ नहीं है.  27 से 29 दिसंबर तक अनशन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इसके बाद 30 दिसंबर से 1 जनवरी तक जेल भरो आंदोलन किया जाएगा. अन्ना हजारे 30 दिसंबर को दिल्ली आ जाएंगे और यहां सोनिया गांधी के घर पर धरना देंगे. इंडिया अगेंस्ट करप्शन ने सोनिया के घर पर अन्ना के अनशन को  कामयाब बनाने के लिए पूरी तैयारी की है.

सरकारी ड्राफ्ट मंजूर नहीं – टीम अन्ना ने सीधे शब्दों में उस ड्राफ्ट को नामंजूर कर दिया है जिस पर विचार के लिए कैबिनेट की बैठक होने वाली है. अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इस ड्राफ्ट के मुताबिक लोकपाल बेहद कमजोर होगा. उसे जांच करने का भी अधिकार नहीं होगा. ड्राफ्ट के मुताबिक यह अधिकार सीबीआई को होगा. हम सब जानते हैं कि सीबीआई जांच-वांच नहीं करती, वह सिर्फ गठबंधन सरकार को बचाने का काम करती है.  क्या उस स्थिति में 27 तारीख से अन्ना के अनशन को तय मान लेना चाहिए, केजरीवाल ने कहा कि हम इंतजार करेंगे और जो फाइनल बिल संसद में पेश होगा और वहां से पास होगा उसे देखने के बाद ही अपना रुख तय करेंगे. सरकारी लोकपाल पर टिप्पणी करते हुए टीम अन्ना सदस्य किरण बेदी ने ट्वीट किया, क्या आपने कभी ऐसी जांच संस्था को बनाए जाने के बारे में सुना है जिसके पास जांच करने का ही अधिकार न हो?

आंदोलन को रोकना चाहती है सरकार – सूत्रों ने कहा है कि सरकार ने यह निर्णय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा अगस्त में किए गए वादे को पूरा करने के लिए लिया है. सिंह ने अगस्त में कहा था कि लोकपाल विधेयक शीतकालीन सत्र में पारित किया जाएगा. सरकार, सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के आंदोलन को भी रोकना चाहती है. अन्ना ने लोकपाल विधेयक न पारित होने की स्थिति में 27 दिसंबर से अनशन की चेतावनी दी है. नए कार्यक्रम के अनुसार, संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही क्रिसमस की छुट्टी के लिए 22 दिसंबर को स्थगित कर दी जाएगी और 27 दिसंबर से सदन की बैठक फिर शुरू हो जाएगी. केंद्रीय श्रम राज्य मंत्री हरीश रावत ने कहा कि लोकपाल विधेयक को मंजूरी के लिए मंगलवार शाम साढ़े सात बजे मंत्रिमंडल की बैठक में पेश किया जाएगा. इसके साथ ही खुलासा करने वालों से सम्बंधित विधेयक भी पेश किया जाएगा.

सिटीजन चार्टर बिल पेश किया गया

नयी दिल्ली, 20 दिसंबर, नससे. सरकार ने बहुप्रतिक्षित चार्टर बिल आज पेश कर दिया. जिसके कानून का रूप लेने के बाद प्रत्येक प्राधिकरण और विभाग के लिए सिटीजन चार्टर (नागरिक अधिकार पत्र) का प्रकाशन और शिकायतों का 30 दिन के भीतर निपटारा अनिवार्य होगा. इसमें विफल रहने पर संबंधित अधिकारी को कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा. ‘नागरिक माल और सेवाओं का समयबद्ध परिदान और शिकायत निवारण अधिकार विधेयक 2011’ कार्मिक राज्य मंत्री वी नारायणसामी ने सदन में पेश किया. प्रत्येक विभाग की ओर से एक सिटीजन चार्टर का प्रकाशन अन्ना हजारे की एक प्रमुख मांग है. हालांकि वह इसे लोकपाल विधेयक के ही हिस्से के रूप में चाहते थे. सरकार ने विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार से निपटने के लिए अलग से विधेयक पेश किया है और यह विधेयक इसका हिस्सा है. चार्टर में सरकारी अधिकारियों के लिए यह भी अनिवार्य किया गया है कि वे जनता से शिकायत मिलने के दो दिन के भीतर उसका संज्ञान लेंगे.

लोकपाल के अलावा दो और बिल भी
अब 27, 28 और 29 दिसंबर को भी संसद चलेगी. विंटर सेशन में लोकपाल बिल के अलावा न्यायिक जवाबदेही बिल और विसिलब्लोअर बिल को भी पेश किए जाने की संभावना है. इससे पहले 22 दिसंबर को विंटर सेशन का समापन होना था. विधेयक में प्रशासन में निचले स्तर के रिश्वत संबंधी मामलों को निपटाने के लिए एक शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने का भी प्रावधान किया गया है. यह कदम टीम अन्ना के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की पृष्ठभूमि में उठाया गया है. यह विधेयक सभी योजनाओं और केन्द्र सरकार के सभी विभागों को कवर करेगा तथा राज्यों को अपने यहां भी इसी प्रकार की प्रणाली को स्थापित करने के लिए एक मंच उपलब्ध कराएगा.

 

  • लोकपाल को नहीं जांच का अधिकार.
  • स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के बाद लोकपाल के मसौदे में कई बार फेरबदल.
  • लोकपाल को संवैधानिक दर्जा दिया जाएगा.
  • प्रधानमंत्री को कुछ शर्तों के साथ लोकपाल के दायरे में लाया गया.
  • सीबीआई को लोकपाल के दायरे से बाहर रखा गया.
  • सीबीआई निदेशक की नियुक्ति प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष और मुख्य न्यायाधीश मिलकर करेंगे.
  • सरकार लोकपाल में 50 फीसदी आरक्षण देने को राजी.
  • 30-31 दिसंबर और एक जनवरी को जेल भरो आंदोलन होगा.
  • अब सरकार अपने रास्ते पर जाएगी, हम अपने रास्ते पर जाएंगे-अन्ना हजारे
  • 27 से 29 तक अन्ना का अनशन मुंबई में होगा-अरविंद केजरीवाल

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