श्रीकृष्ण हमारे मन का करते है अपहरण

भोपाल, 20 अक्टूबर. राष्टरसंत साध्वी मां कनकेश्वरी देवी ने दुनिया के लागों को भक्तिवान बनने का संदेश दिया है जो कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से संभव है. राविंद्र भवन के मुक्ताकाश मंच में स्व. प्रसून सारंग की समृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन आज छटवें दिवस पर मां कनकेश्वरी देवी ने कहा कि भागवत में भक्ति रस की गंगा बहती है.

उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा शुखदेव महाराज परीक्षित को पिलाते है. भागवत गंगा तट पर हो रही है. जिसका प्रधान निरूपड़ भागवत भाव है. गंगा तट पर श्रीशुखदेव का प्रयास परीक्षित को भक्ति और भाव से भरने का है. परीक्षित का प्रश्न, लोक कल्याण का है,जगत कल्याण का है. कम समय में भक्ति से ही इंद्रियों में नियंत्रण होता है. भक्ति और ज्ञान की चर्चा करते हुए मां कनकेश्वरी देवी ने कहा कि अनियंत्रित वृत्ति से किए गए अच्छे कार्य भी ठीक नहीं होते. ऐसे रोगी कलयुग में बहुत है जो धर्मी माने जाते है लेकिन व्यवहार में नहीं होते. स्वयं पर नियंत्रण करो क्योंकि स्वयं नियत्रित न हो पाना ही कलि रोग है.

धार्मिकता के भ्रम में किए कार्यों से सद्कार्य का सुख नहीं मिलता. जब तक भाव शुद्घ नहीं होता तब तक श्रीकृष्ण नहीं आते. उन्हें बुलानें के लिए भाव शुद्घिकरण जरूरी है. तुलसी ने श्रीकृष्ण गीतावली में लिखा है कि श्रीकृष्ण आज भी हमारे मन का अपहरण करते है. इसलिए अपने मन में भागवत भाव जागृत करें. और स्वयं पर नियंत्रण करें. क्योंकि भाव की प्रधानता में ज्ञानी सहज बन जाता है. प्रयास भक्ति के लिए होना चाहिए. फिर ज्ञान वैराग्य आ जाए उसका भी मजा लो. भक्त में ज्ञान वैराग्य तपस्या की धारणा जुड़ जाए तो भी भक्त ही कहलाता है. मीरा के पदों में भी ज्ञानधारा और भक्ति का भाव है.

“एक सूर चराचर छायो, घट-घट तुंबा बना उसी का ऐसो नाद जगायो

भागवत कथा के आरंभ में वारिष्ठ पत्रकार सुरेश महरोत्रा, बाल साहित्यकार महेश सक्सेना, आयुर्वेदाचार्य पं. चंद्रशेखर तिवारी, समाज सेवी नामदेव, योगाचार्य श्रीरामनारायण जोशी को सम्मनित किया गया. इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकाश मंत्री गोपाल भार्गव, सहकारिता मंत्री गौरी शंकर विसेन, कैलाश नारायण सारंग, विश्वास सारंग, दीपक लालचंदानी, रवि गगरानी, पूर्व विधायक पी.सी.शर्मा, किसन सिंह भटोला, रामाकांत भार्गव, विभा पटेल, दीपचंद यादव, जे.पी.धनोपिया, गणेश बागदरे, भगवानदेव इसराणी, जनकराम आडवाणी, सुरेश तिवारी, वीरेन्द्र पाठक आदि उपस्थित थे.

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