कोयला घोटाले पर दूसरे दिन भी नहीं चली संसद

मनमोहन के इस्तीफे पर अड़ी भाजपा

नयी दिल्ली, 22 अगस्त. कोयला ब्लाक आवंटन मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष की भारी नारेबाजी तथा हंगामें के बीच संसद की कार्यवाही आज लगातार दूसरे दिन भी नहीं चली.

विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही तीन बार और लोकसभा में दो बार के बाद कार्यवाही दिनभर के लिये स्थगित कर दी गयी. लोकसभा में  11 बजे अध्यक्ष मीरा कुमार ने जैसे ही प्रश्नकाल शुरू करने की घोषणा की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल दलों के सदस्य उनके आसन के सामने आकर शोरशराबा करने लगे. भारतीय जनता पार्टी . जनता दल यू. शिव सेना. अकाली दल. अन्नाद्रमुक और कुछ अन्य पार्टियों के सदस्य. प्रधानमंत्री इस्तीफा दो. के नारे लगा रहे थे.

वाम दलों के सदस्य भी इस मांग के समर्थन में अपनी सीटों से खडे हो गए . अध्यक्ष ने उत्तेजित सदस्यों से अपनी सीटों पर जाने और सदन की कार्यवाही चलने देने का आग्रह किया . लेकिन इसका कोई असर नहीं होने पर उन्होंने भारी शोरशराबे के बीच सदन की कार्यवाही दोपहर .2 बजे तक स्थगित कर दी . बारह बजे अध्यक्ष मीरा कुमार ने जैसे ही आसन संभाला भारतीय जनता पार्टी तथा उसके सहयोगी पार्टियों के सदस्य आसन के सामने पहुंच गए तथा प्रधानमंत्री इस्तीफा दो. प्रधानमंत्री गद्दी छोडो के नारे लगाने लगे. अन्ना द्रमुक तथा वाम दलों के सदस्य भी इस मांग के समर्थन में अपनी सीटों से खड़े हो गए. लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने शोरगुल और हंगामें के बीच तय कार्यसूची के अनुसार कागजात सदन पटल पर रखवाये. इसी बीच संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल खडे होकर कुछ कहते देखे गए. लेकिन उनकी आवाज हंगामें में डूब गई. श्रीमती कुमार ने हंगामा शांत होता न देख सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी.

दो बार स्थगित होने के बाद अपराह्नन दो बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुयी मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के सदस्य आसन के पास आकर प्रधानमंत्री इस्तीफा दो.. प्रधानमंत्री गद्दी छोडो के नारे.. लगाने लगे. शोरगुल के बीच संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा के लिये तैयार है लेकिन विपक्ष चर्चा से भाग रहा है. उन्होंने कहा कि विपक्ष संसद का मखौल उडा रही है. उपाध्यक्ष करिया मुंडा ने हंगामा शांत नहीं होने की संभावना को देखते हुये सदन की कार्यवाही दिन भर के लिये स्थगित कर दी.

सरकार जाए: भाजपा

राज्यसभा में सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी. सभापति हामिद अंसारी ने विपक्ष के नेता अरूण जेटली और भाजपा के अग्रिम पंक्ति के सदस्य एम वेंकैया नायडू से पूछा कि शोर के बजाए क्या उनकी ओर से कोई कुछ कहना चाहता है तो श्री नायडू ने कहा हम तो यही कहना चाहते हैं कि यह सरकार जाए.
चर्चा के लिए तैयार

सरकार की ओर से संसदीय कार्य राज्यमंत्री राजीव शुक्ला कल की बात दोहरा रहे थे कि सरकार बहस के लिए तैयार है और विपक्ष चर्चा से भाग रहा है. लेकिन उनकी बातों का कोई असर नहीं हुआ और हंगामा जारी रहा जिसके बाद सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई. फिर बारह बजे सदन के समवेत होने पर वैसा ही नजारा रहा. उपसभापति पी जे कुरियन ने मंत्रियों से आवश्यक कागजात सदन के पटल पर रखवाये और कार्यवाही तीसरी बार दोपहर बाद दो बजे तक स्थगित कर दी.

सुबह तीन बार के स्थगन के बाद जब सदन दोपहर बाद दो बजे फिर से बैठा तो वही नजारा पेश हो गया. भारी शोरशराबा और प्रधानमंत्री इस्तीफा दो के नारों से सदन गूंजने लगा. सरकार की ओर से बार बार यह दुहाई दी गई कि वह विपक्ष के किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है लेकिन ये अपीलें शोर में गुम हो गईं. विपक्ष के तेवर देखते हुए सदन की र्कावाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई.

कोयला ब्लाकों के सरकारी खजाने को 1186 लाख करोड रुपए का नुकसान होने की नियंत्रक एवं लेखा महापरीक्षक की रिपोर्ट को लेकर हंगामे के कारण आज लगातार दूसरे दिन भी संसद नहीं चली. सन 2005 से 2009 के बीच कोयला मंत्रालय का प्रभार प्रधानमंत्री के पास रहने के कारण विपक्ष इस मामले में उन्हें सीधे जिम्मेदार मानता है और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष के हंगामे की वजह से संसद में मंगलवार को कोई कामकाज नहीं हो सका था.

प्रधानमंत्री जिम्मेदारी लें : जेटली

कोयला ब्लॉक आवंटन में कथित अनियमितता के मुद्दे पर भाजपा आज भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफे पर अड़ी रही और कहा कि संसद में गतिरोध समाप्त करने का एकमात्र रास्ता यही है कि कैग की रिपोर्ट के मुताबिक हुए 1.86 लाख करोड़ रुपये के नुकसान की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री लें। राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला और कोयला ब्लॉक आवंटन विवाद की तुलना करते हुए संवाददाताओं से कहा कि 2जी घोटाले में जहां प्रधानमंत्री राजनीतिक तौर पर और अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार हैं वहीं कोयला मामले में वह सीधे तौर पर शामिल हैं।  संसद में गतिरोध समाप्त करने का एकमात्र रास्ता यही है कि प्रधानमंत्री जिम्मेदारी लें और उसके मुताबिक कार्रवाई करें। इतने भारी नुकसान के लिए प्रधानमंत्री अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।

मुख्य विपक्षी पार्टी ने प्रधानमंत्री की उस सफाई को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने इस विषय पर सदन में चर्चा कराने का सुझाव दिया था। भाजपा ने कहा कि सरकार इन विषयों पर कभी गंभीर नहीं रही और दोषियों को दंडित करने के लिए कोई पहल नहीं की। पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने आज सुबह संसदीय दल की बैठक में कहा, ”यह सरकार देश पर भार बन गई है और देश के उपर धब्बा है। इसलिए इस सरकार को जाना चाहिए।ÓÓ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग पर पार्टी कायम रहेगी।

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